ट्रांजिट रिमांड पर BSA शालिनी:गोरखपुर पुलिस ने दिल्ली से किया था अरेस्ट, शिक्षक सुसाइड केस में 4 महीने से फरार थी


गोरखपुर में शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह सुसाइड केस में नामजद मुख्य आरोपी शालिनी श्रीवास्तव को गिरफ्तार करने के बाद गुलरिहा पुलिस ने ट्रांजिट रिमांड पर ले लिया है। मंगलवार को दिल्ली में पकड़ी गई। उसके बाद बुधवार को कोर्ट में पेश कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल में बंद कर दिया। वह पिछले चार महीने से फरार चल रही थी। पुलिस ने उसपर 25 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था। वहीं इस मामले दूसराआरोपी निलंबित लिपिक संजीव अभी भी फरार है। उसकी तलाश तेज कर दी गई है। सर्विलांस की मदद से मिला लोकेशन
जानकारी के मुताबिक शालिनी श्रीवास्तव पत्नी सौरभ कुमार सिन्हा मूल रूप से बलिया जिले के कोतवाली क्षेत्र स्थित आनंद नगर, बड़ी काली मंदिर की रहने वाली है। पुलिस के अनुसार तकनीकी साक्ष्यों और सर्विलांस की मदद से उनकी लोकेशन नई दिल्ली में मिली थी। इसके बाद गुलरिहा पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम ने मंगलवार को उन्हें गिरफ्तार कर लिया। न्यायालय से ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद टीम उन्हें लेकर गोरखपुर रवाना हुई और बुधवार सुबह यहां पहुंची। पत्नी ने FIR दर्ज कराई थी
एसपी सिटी निमिष पाटील ने बताया कि 21 फरवरी 2026 को शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने आत्महत्या कर ली थी। अगले दिन उनकी पत्नी गुड़िया सिंह ने गुलरिहा थाने में तहरीर देकर तत्कालीन बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पर गंभीर आरोप लगाए थे। मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का लगा आरोप आरोप था कि दोनों ने शिक्षक को लगातार प्रताड़ित किया, झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी और मानसिक दबाव बनाया, जिससे आहत होकर उन्होंने आत्मघाती कदम उठा लिया। तहरीर के आधार पर गुलरिहा थाने में सुसाइड के लिए उकसाने, धमकी देने, साक्ष्य मिटाने और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। विवेचना के दौरान यह भी आरोप सामने आया कि हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन कराने के नाम पर शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह, ओमकार सिंह और अपर्णा तिवारी से 16-16 लाख रुपये की मांग की गई थी। चार पन्नो का नोट लिख किया सुसाइड
आरोप है कि 20 फरवरी को कृष्ण मोहन सिंह को ऑफिस बुलाकर अपमानित भी किया गया था। इसके अगले दिन उन्होंने आत्महत्या कर ली। जांच के दौरान कृष्णमोहन की जेब से चार पन्नों का सुसाइड नोट भी मिला था, जिसमें शालिनी श्रीवास्तव और संजीव सिंह को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था। न्यायालय से नहीं मिली राहत
मुकदमा दर्ज होने के बाद से दोनों आरोपित फरार चल रहे थे। पुलिस ने दोनों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कराने के साथ 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। इसके अलावा भगोड़ा घोषित करने और संपत्ति कुर्क करने की भी तैयारी थी। शालिनी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए न्यायालय की शरण भी ली थी, लेकिन राहत नहीं मिल सकी।

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