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उन्नाव के गंगाघाट क्षेत्र स्थित मझरा पीपरखेड़ा एहतमाली में भूमि संख्या-459 को लेकर विवाद फिर गहरा गया है। प्लॉट मालिकों ने आरोप लगाया है कि बिना किसी पूर्व सूचना या दस्तावेजों की जांच के उनका निर्माण गिरा दिया गया। उन्होंने इस प्रशासनिक कार्रवाई पर असंतोष व्यक्त किया है। यह मामला ग्राम मझरा पीपरखेड़ा एहतमाली की भूमि संख्या-459 से संबंधित है। गंगाघाट निवासी वीएसपी सिंह ने बताया कि पांच लोगों ने वर्षों पहले इस भूमि पर प्लॉट खरीदे थे, जिनमें एक 200 वर्गगज और चार 100-100 वर्गगज के थे। उनका आरोप है कि 27 अगस्त 2024 को बिना किसी पूर्व सूचना, नोटिस या दस्तावेजों की जांच के उनके निर्माण को ध्वस्त कर दिया गया। वीएसपी सिंह के अनुसार, जब उन्हें निर्माण गिराए जाने की सूचना मिली, तो वे मौके पर पहुंचे। वहां एडीएम और एआरओ सहित कई अधिकारी मौजूद थे। सिंह का दावा है कि एडीएम ने उनसे कहा कि वे केवल निर्माण गिराने आए हैं, कागजात देखने नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने उनके दस्तावेजों की जांच नहीं की। वीएसपी सिंह ने बताया कि यह विवाद लगभग 11 वर्षों से जारी है। वर्ष 2016 में उन्होंने तत्कालीन लेखपाल से पैमाइश कराने के बाद निर्माण शुरू किया था, लेकिन उस समय भी इसे रोक दिया गया था। इसके बाद उन्होंने अधिकारियों से शिकायत की। सिंह का दावा है कि कई बार की जांच में उनकी चौहद्दी सही पाई गई और उनके पक्ष में निर्णय भी आए।
उनके अनुसार, वर्ष 2023 में सभी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद उन्होंने दोबारा निर्माण कार्य शुरू किया था। हालांकि, वर्ष 2024 में एक बार फिर उनका निर्माण ध्वस्त कर दिया गया। सिंह का आरोप है कि यदि प्रशासन पहले उनके कागजात की जांच करता और फिर कार्रवाई करता, तो स्थिति अधिक स्पष्ट होती। दूसरी ओर, प्रशासन की जांच रिपोर्ट में शिकायतकर्ताओं के प्लॉट पर स्थलीय कब्जा पाए जाने की बात सामने आई है। प्रशासन ने दोनों पक्षों को अवैध कब्जा या निर्माण करने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। प्रशासन की जांच में यह भी बताया गया है कि भूमि संख्या-459 की मूल भूस्वामिनी चंद्रकली पत्नी महादेव, निवासी परमसुखखेड़ा थीं।
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पीपरखेड़ा प्लॉट विवाद, निर्माण गिराने का आरोप:पीड़ित ने बिना नोटिस कार्रवाई पर जांच और मुआवजे की मांग की