गाज़ियाबाद गैंगस्टर केस में परिवार को राहत:हाईकोर्ट की पूर्व पुलिस कमिश्नर को फटकार, मुकदमें रद्द किए


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाज़ियाबाद के राजेंद्र त्यागी और उनके परिवार के खिलाफ उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एवं असामाजिक गतिविधि (निवारण) अधिनियम, 1986 के तहत दर्ज मुकदमे को रद्द कर दिया। 12 फरवरी 2023 को पुलिस स्टेशन नंदग्राम, गाज़ियाबाद में राजेंद्र त्यागी, उनके बेटे दीपक त्यागी और बहू लालिता त्यागी के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की धारा 2 और 3 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोप था कि ये जमीन-प्लॉट दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी व धोखाधड़ी करते हैं। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने कहा कि दोनों मूल एफआईआर केवल जमीन खरीद-बिक्री से जुड़े वित्तीय विवाद हैं। चार्जशीट में ऐसा कोई तथ्य नहीं जो गैंगस्टर एक्ट की धारा 2(बी) की शर्तें पूरी करता हो। साथ ही यह भी कहा कि गृहिणी लालिता त्यागी जिनकी उम्र मात्र 35 वर्ष थी ,की गिरफ्तारी पूरी तरह गैरकानूनी और मनमानी थी। वे बिना किसी ठोस आधार के लगभग 80 दिन न्यायिक हिरासत में रहीं। तत्कालीन कमिश्नर ऑफ पुलिस गाज़ियाबाद को फटकार अदालत ने तत्कालीन कमिश्नर ऑफ पुलिस गाज़ियाबाद, अजय कुमार मिश्र (जो अब आई जी पुलिस, प्रयागराज हैं) के खिलाफ कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि उन्होंने अपने अधिकार का दुरुपयोग किया, अधीनस्थों पर पर्याप्त नियंत्रण नहीं रखा, और सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया। हालांकि, भविष्य के करियर को देखते हुए अदालत ने उन्हें केवल सतर्क और सावधान रहने का निर्देश दिया। अदालत ने यूपी गृह विभाग की भी आलोचना की और कहा कि कमिश्नरेट जिलों में गैंग चार्ट अनुमोदन में जिलाधिकारी की अनिवार्य भागीदारी समाप्त करना नियम 5(3)(ए) का उल्लंघन है। गृह विभाग बार-बार मांगे गए तथ्यात्मक आंकड़े और जवाब देने में विफल रहा। अदालत ने सत्र परीक्षण संख्या 3072/2023 की समस्त कार्यवाही रद्द करते हुए याचिका स्वीकार कर लिया।

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