Pakistan Fuel Price Hike | Petrol Diesel Prices Increase 2026

इस्लामाबादकुछ ही क्षण पहले

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पाकिस्तान में लोग पेट्रोल स्टेशन पर ईंधन भरवाते हुए। - Dainik Bhaskar

पाकिस्तान में लोग पेट्रोल स्टेशन पर ईंधन भरवाते हुए।

पाकिस्तानी सरकार ने पेट्रोल के दाम में 4.93 रुपया प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल (HSD) में 7.15 रुपया प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। नई दरें 22 जुलाई से लागू हो गई हैं।

दामों में इस बदलाव के बाद अब बाजार में पेट्रोल की नई कीमत 320.73 रुपया लीटर और हाई-स्पीड डीजल की कीमत 367.21 रुपया प्रति लीटर हो गई है।

भारत और पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल की कीमतें

ईंधन भारत पाकिस्तान
पेट्रोल ₹102.12 367.21 रुपया (₹127.33)
डीजल ₹95.20 320.73 रुपया (₹111.21)

नोट: ₹- भारतीय रुपया, पाकिस्तान में भारतीय रुपए की वेल्यू 2.88 पाकिस्तानी रुपया के बराबर है।

अप्रैल के रिकॉर्ड हाई से कम हैं मौजूदा दरें

ईंधन की मौजूदा कीमतें इस साल अप्रैल में बने अपने ऑल-टाइम हाई से अब भी काफी नीचे हैं:

  • डीजल: 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान जंग शुरू होने के बाद डीजल 281 रुपया लीटर से बढ़ना शुरू हुआ था और 3 अप्रैल को यह 520.35 रुपया के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था।
  • पेट्रोल: मार्च के पहले हफ्ते में पेट्रोल 266 रुपया प्रति लीटर पर था, जो 3 अप्रैल को उछलकर 458.41 रुपया लीटर के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था।

अब हफ्ते की जगह रोजाना तय हो रहे पेट्रोल डीजल के दाम

अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतों में आ रहे तेज उतार-चढ़ाव को देखते हुए सरकार ने बड़ा नीतिगत बदलाव किया है। पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने घोषणा की है कि अब देश में फ्यूल रेट्स हफ्ते के बजाय रोजाना आधार पर तय किए जाएंगे।

डीलर्स एसोसिएशन ने फैसले का विरोध किया

सरकार के रोजाना रेट तय करने के फैसले का ऑल पाकिस्तान डीलर्स एसोसिएशन ने कड़ा विरोध किया है। एसोसिएशन ने इस व्यवस्था को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि वे इस फैसले के खिलाफ इसी हफ्ते विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं।

मिडिल क्लास और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर

पेट्रोल की कीमतों में बदलाव का सीधा असर देश के मिडिल और लोअर-मिडिल क्लास पर पड़ता है, क्योंकि इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से प्राइवेट गाड़ियों, छोटी कारों, ऑटो रिक्शा और टू-व्हीलर्स में होता है। वहीं, डीजल महंगा होने से पूरे देश में महंगाई बढ़ने का खतरा है, क्योंकि इसका इस्तेमाल भारी कमर्शियल वाहनों (ट्रकों-बसों), पावर प्लांट्स और बड़े जनरेटरों में होता है।

पाकिस्तान में हर महीने करीब 7 से 8 लाख टन पेट्रोल और डीजल की भारी-भरकम बिक्री होती है, जबकि केरोसिन (मिट्टी के तेल) की मासिक मांग सिर्फ 10 हजार टन ही है। यही वजह है कि पेट्रोल-डीजल सरकार के लिए रेवेन्यू जुटाने का सबसे बड़ा जरिया बने हुए हैं।

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