वरुण कुमार शर्मा | मुजफ्फरनगर6 मिनट पहले
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मुजफ्फरनगर की मंसूरपुर स्थित सरशादी लाल डिस्टलरी का विवाद एक बार फिर सड़कों पर पहुंच गया है। वर्षों से वेतन न मिलने और फैक्ट्री बंद होने से नाराज़ कर्मचारियों, सप्लायरों और ठेकेदारों ने शनिवार रात डिस्टलरी के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रभात स्वरूप की जानसठ रोड स्थित कोठी के बाहर जोरदार धरना-प्रदर्शन कर अपना गुस्सा जाहिर किया।
डिस्टलरी मजदूर यूनियन के नेता अमित राठी के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि लंबे समय से वेतन का भुगतान नहीं किया गया है। उनका कहना है कि डिस्टलरी बंद होने से करीब 1500 लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है, जबकि लगभग 250 कर्मचारियों का करीब 15 करोड़ रुपये वेतन अब भी बकाया है।

अमित राठी ने बताया कि कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर कई बार प्रशासन और श्रम विभाग का दरवाजा खटखटाया। करीब छह महीने पहले श्रम विभाग के समक्ष बैठक भी हुई थी, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला।
उन्होंने दावा किया कि कर्मचारियों ने डिस्टलरी परिसर में 43 दिनों तक धरना दिया, मुख्यमंत्री तक अपनी बात पहुंचाई और कई ज्ञापन भी सौंपे, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। यूनियन का आरोप है कि आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव के चलते इस दौरान 13 कर्मचारियों की मौत भी हो चुकी है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे अब और इंतजार करने की स्थिति में नहीं हैं और अपना हक लेकर ही रहेंगे।
धरने के दौरान DM और SSP को भी मामले से अवगत कराया गया। कर्मचारियों का कहना है कि सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से प्रबंधन से संपर्क कराने का प्रयास किया गया, लेकिन मैनेजिंग डायरेक्टर प्रभात स्वरूप किसी का फोन तक नहीं उठा रहे हैं। कर्मचारियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि जब तक बकाया वेतन का भुगतान नहीं होता, तब तक एमडी की कोठी के बाहर उनका धरना और संघर्ष जारी रहेगा।
