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- Digital Assets Inheritance: 70% Globally Concerned, Few Nominate Successors | 2026
3 घंटे पहले
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डिजिटल वसीयत न होने से निवेशकों के ₹1,800 करोड़ डूबने और लंबी कानूनी लड़ाई के उदाहरण मौजूद हैं।
डिजिटल क्रांति के दौर में हम अपने मकान, जमीन, दुकान और बैंक खातों के लिए तो वारिस/नॉमिनी चुन लेते हैं, लेकिन अपनी ‘डिजिटल संपत्ति’ को भूल जाते हैं। मृत्यु के बाद ई-मेल, यूट्यूब चैनल, इंस्टा-फेसबुक अकाउंट, वॉट्सऐप व पेटीएम जैसे वॉलेट का वारिस कौन होगा, ये तय ही नहीं करते।
मैकएफी का ‘डिजिटल आफ्टरलाइफ’ सर्वे के मुताबिक, दुनियाभर में 70% से ज्यादा लोग इस बात को लेकर चिंतित हैं कि उनके मरने के बाद उनके ऑनलाइन डेटा का क्या होगा? लेकिन 10-15% लोग ही ‘डिजिटल वसीयत’ बनाते हैं।
डिजिटल वसीयत ऐसा कानूनी दस्तावेज है, जिसमें आप तय करते हैं कि आपके मरने के बाद आपकी डिजिटल संपत्तियों का क्या होगा।


निवेशकों के 1,800 करोड़ रु. डूबने और लंबी कानूनी लड़ाई के उदाहरण मौजूद हैं
क्वाड्रिगासीएक्स (कनाडा): 2018 में क्रिप्टो एक्सचेंज प्रमुख जेराल्ड कॉटन की मौत के बाद पासवर्ड बैकअप या डिजिटल वसीयत न होने से निवेशकों के 19 करोड़ डॉलर (करीब 1,804 करोड़ रु.) हमेशा के लिए लॉक हो गए, जिससे बाद में यह कंपनी दिवालिया भी हो गई।
एप्पल बनाम राशेल (यूके): पति की मौत के बाद लेगेसी कॉन्टैक्ट न होने से एप्पल ने प्राइवेसी का हवाला देकर डेटा ब्लॉक कर दिया। पत्नी को पारिवारिक तस्वीरें पाने के लिए कई महीनों तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी।
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