दिगंबर जैन महाविद्यालय में 22 सहायक प्रोफेसरों की नियुक्ति वैध:हाईकोर्ट ने बागपत मामले में चयनित अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला सुनाया


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बागपत स्थित दिगंबर जैन महाविद्यालय बड़ौत में 22 सहायक प्रोफेसरों की नियुक्ति प्रक्रिया को वैध ठहराते हुए चयनित अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला सुनाया।
न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकलपीठ ने सुनील कुमार जैन सहित दो अन्य याचिकाओं की एक साथ सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट ने सुनील जैन की याचिका खारिज कर दी । प्रबंध समिति की याचिका निस्तारित कर दी है। जानिए क्या है पूरा मामला
अल्पसंख्यक संस्था दिगंबर जैन महाविद्यालय में 22 रिक्त पदों पर भर्ती के लिए अगस्त 2023 में विज्ञापन जारी किए गए थे। इसी बीच राज्य सरकार ने उ.प्र. शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियम, 2023 21 अगस्त 2023 को अधिसूचित कर दिया। कोर्ट के समक्ष मुख्य कानूनी सवाल यह था कि *क्या भर्ती प्रक्रिया की शुरुआत विज्ञापन प्रकाशन की तिथि से मानी जाएगी या नियुक्ति की अनुमति की तिथि से और यदि बीच में नया कानून आ जाए तो पुरानी प्रक्रिया पर क्या असर पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट केस का हवाला
कोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय तेज प्रकाश पाठक बनाम राजस्थान उच्च न्यायालय (2025) का हवाला देते हुए स्पष्ट किया:कि भर्ती प्रक्रिया विज्ञापन जारी होने की तिथि से प्रारंभ होती है और रिक्त पदों की पूर्ति होने पर समाप्त होती है। चूंकि विज्ञापन 8 और 12 अगस्त 2023 को प्रकाशित हुए थे और नया अधिनियम 21 अगस्त 2023 को लागू हुआ, इसलिए पुरानी प्रक्रिया अधिनियम 2023 की धारा 31 के तहत संरक्षित है। पहली याचिका दाखिल करने वाले सुनील कुमार जैन जो स्वयं को प्रबंध समिति का कोषाध्यक्ष बताते थे की याचिका चयनित अभ्यर्थियों को पक्षकार न बनाने के आधार पर खारिज कर दी गई। कोर्ट ने कहा कि जब नियुक्ति पत्र जारी हो चुके थे और अभ्यर्थी ज्वाइन भी कर चुके थे, तो उन्हें पक्षकार बनाना अनिवार्य था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 26 फरवरी 2026 को वेतन रोकने का आदेश और 2 अप्रैल 2026 को विश्वविद्यालय द्वारा नियुक्ति अनुमोदन निलंबित करने का आदेश दोनों पहली याचिका में दिए गए अंतरिम आदेश के आधार पर पारित हुए थे। अब वह अंतरिम आदेश समाप्त होने के कारण ये आदेश भी स्वतः निष्प्रभावी हो गए।- कोर्ट ने 20 नवंबर 2024 के उस आदेश की भी आलोचना की ,जिसमें उच्च शिक्षा के प्रमुख सचिव ने बिना कोई कारण बताए पूर्व आदेश को वापस ले लिया था। कोर्ट ने इसे लापरवाही और अनुचित करार दिया था- नियुक्ति से एक दिन पहले 9 जनवरी 2025 अभ्यर्थियों को ज्वाइन कराने की कार्रवाई को कोर्ट ने अनुचित जल्दबाजी बताया। एक अतुल कुमार जैन जो प्रबंध समिति के चुनाव विवाद से संबंधित है, को जुलाई 2026 के तीसरे सप्ताह में अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। इस फैसले से दिगंबर जैन महाविद्यालय के 22 चयनित सहायक प्रोफेसरों की नौकरी सुरक्षित हो गई है और उनका वेतन व विश्वविद्यालय अनुमोदन बहाल होगा।

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