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देश के 42 शहरों के बीच स्वच्छ हवा को लेकर शुरू हुई प्रतिस्पर्धा इस बार पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गई है। अब केवल शहर या नगर निकाय के प्रदर्शन के आधार पर रैंकिंग तय नहीं होगी, बल्कि शहर के अलग-अलग वर्क सर्किल और वार्ड में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए किए गए कार्यों का भी अलग से मूल्यांकन किया जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर बेहतर काम करने का दबाव बढ़ गया है। इसका परिणाम मिनिस्ट्री ऑफ इनवारयमेंट जारी करेगा। नोएडा प्राधिकरण भी इस प्रतियोगिता में शामिल है। प्राधिकरण का सिविल विभाग अपने-अपने वर्क सर्किल में धूल नियंत्रण, सड़क सफाई, निर्माण स्थलों पर प्रदूषण रोकने के उपाय, ग्रीन कवर बढ़ाने और अन्य गतिविधियों का पूरा ब्योरा तैयार कर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के पोर्टल पर अपलोड कर रहा है। विभागीय रिपोर्ट के साथ अब हर सर्किल और वार्ड के प्रदर्शन का भी रिकॉर्ड भेजा जा रहा है। मूल्यांकन में क्या किया गया बदलाव
दरअसल, इस बार मूल्यांकन प्रणाली में बड़ा बदलाव किया गया है। पहले पूरे शहर के प्रदर्शन के आधार पर रैंकिंग तय होती थी, लेकिन अब यह देखा जाएगा कि शहर के अलग-अलग हिस्सों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए कितनी प्रभावी कार्रवाई की गई। ऐसे में दो रिजल्ट जारी होंगे। एक पूरे शहर के लिए और दूसरा शहर में कौन सा सर्किल या वार्ड सबसे बेस्ट है। इससे अधिकारियों और फील्ड स्तर पर काम करने वाली टीमों की जवाबदेही भी बढ़ गई है। 3 से 10 लाख श्रेणी में प्रतिस्पर्धा
नोएडा 3 से 10 लाख आबादी वाले शहरों की श्रेणी में हिस्सा ले रहा है। इससे पहले आयोजित प्रतियोगिता में नोएडा ने पहली बार छठी रैंक हासिल की थी, जबकि दूसरी बार शहर नौवें स्थान पर रहा था। इस बार प्राधिकरण को उम्मीद है कि स्थानीय स्तर पर बेहतर काम के दम पर शहर की रैंकिंग में सुधार होगा। नवंबर में घोषित होगा परिणाम
प्रतियोगिता के परिणाम नवंबर में घोषित किए जाएंगे। माना जा रहा है कि नई व्यवस्था से शहरों के बीच प्रतिस्पर्धा और तेज होगी, क्योंकि अब केवल पूरे शहर का नहीं, बल्कि प्रत्येक वार्ड और वर्क सर्किल के प्रदर्शन का भी असर अंतिम रैंकिंग पर पड़ेगा।
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देश के 42 शहरों में स्वच्छ हवा की जंग:नोएडा के हर सर्किल की होगी अलग परीक्षा, 3 से 10 लाख की श्रेणी में है शामिल