प्रो. प्रयाग नारायण मिश्र को 'संस्कृतमहामहोपाध्याय' उपाधि मिली:प्रयागराज में हिन्दी साहित्य सम्मेलन ने किया सम्मानित


लखनऊ के अखिल भारतीय संस्कृत परिषद् के मंत्री और इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. प्रयाग नारायण मिश्र को ‘संस्कृतमहामहोपाध्याय’ की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। यह सम्मान प्रयागराज में हिन्दी साहित्य सम्मेलन द्वारा आयोजित डॉ. प्रभात शास्त्री की 108वीं जयंती समारोह में प्रदान किया गया। समारोह में उपस्थित आचार्य और साहित्य प्रेमियों ने प्रो. मिश्र का अभिनंदन किया। यह सम्मान संस्कृत भाषा और भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन में उनके महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित करता है।प्रो. प्रयाग नारायण मिश्र का शैक्षणिक सफर लखनऊ विश्वविद्यालय से शुरू हुआ, जहाँ उन्होंने डी.लिट् तक की उच्च शिक्षा प्राप्त की। 20 से अधिक ग्रंथ और शोधपत्र प्रकाशित उन्होंने संस्कृत भाषा और भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान दिया है और अब तक लगभग 20 शोधार्थियों का सफलतापूर्वक मार्गदर्शन किया है।संस्कृत साहित्य के क्षेत्र में उनकी विद्वत्ता व्यापक है। उनके 20 से अधिक ग्रंथ और 100 से ज्यादा शोधपत्र प्रकाशित हो चुके हैं। वे ‘अजस्रा’, ‘संस्कृतवाङ्मयी’ और ‘प्राच्यप्रभा’ जैसी प्रतिष्ठित शोध पत्रिकाओं के संपादक भी हैं। प्रो. मिश्र आठ से अधिक पुरस्कारों से सम्मानित देशभर में आयोजित लगभग 200 सम्मेलनों और 100 से अधिक विशिष्ट व्याख्यानों के माध्यम से उन्होंने संस्कृत जगत को नई दिशा प्रदान की है। प्रो. मिश्र को आठ से अधिक पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें एक उत्कृष्ट लेखक, ओजस्वी वक्ता, संस्कृत कवि और शोधकर्ता के रूप में विशेष पहचान मिली है। सम्मान प्राप्त करने के बाद उन्होंने हिन्दी साहित्य सम्मेलन के प्रधानमंत्री कुन्तक मिश्र, सभापति प्रो. सूर्यप्रसाद दीक्षित, उपसभापति विभूति मिश्र तथा डॉ. प्रभात शास्त्री के परिजनों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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