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हमारे घर पर स्मार्ट मीटर नहीं लगा है, हम लोगों को सरकार और अधिकारी सब मूर्ख समझ रहे हैं। यहां बिजली केवल 10 मिनट के लिए आती है, फिर गायब हो जाती है। अधिकारी तो एसी में सोते हैं और हम लोग सड़क पर टहल के रात गुजारने के लिए मजबूर हैं। ये कहना है बेगमपुरवा की रहने वाली 68 साल की हस्रतुन निशा का। इस समय यहां के रहने वाले 30 हजार लोगों का यही दर्द है। बिजली संकट को लेकर गोविंद नगर के विधायक सुरेन्द्र मैथानी ने केस्को एमडी नेहा जैन से मुलाकात कर इस समस्या को दूर करने के लिए कहा था। लेकिन अभी तक ये समस्या दूर नहीं हो पाई है। कानपुर शहर के दक्षिण एरिया के विधानसभा क्षेत्र के कैंट, गोविंदनगर और किदवईनगर एरिया में बिजली संकट गहराता जा रहा है। यहां के लोगों का कहना है, हम लोग पूरी रात जागते है। लोग घरों में सो नहीं पा रहे है। जिसकी वजह से बच्चे और बुजुर्ग सभी परेशान है। इस समस्या को लेकर यहां के रहने वाले लोगों ने पार्षद अकील शानू के दफ्तर के बाहर पहुंच प्रदर्शन किया। जनता के प्रदर्शन की तस्वीरें देखिए कानपुर का बाबूपुरवा सब-स्टेशन का एरिया इन दिनों लापरवाही का अड्डा बन चुका है। यहां से 1 किमी दूर स्थित आनंदपुरी इलाके में केस्को की एमडी नेहा जैन का आवास बना हुआ है, इसी के पास बेगमपुरवा, मुंशीपुरवा, अजीतगंज, बगाही और ढकना-पुरवा जैसे इलाकों में बिजली व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त है। अब यहां के रहने वाले लोग धरना- प्रदर्शन करने के लिए मजबूर हैं। ऑनलाइन के चक्कर में ‘ऑफलाइन’ हुई जिंदगी कानपुर के बाबूपुरवा एरिया की पार्षद निशा अकील शानू यहां की पार्षद है। निशा के पति के अकील शानू ने बताया कि केस्को ने जब से सिस्टम को ऑनलाइन किया है, तब से यहां की रहने वाली जनता की मुसीबत दोगुनी हो गई है। यदि पहले कहीं फॉल्ट हो जाता था, तब लोकल सब-स्टेशन के सीयूजी (CUG) नंबर पर फोन लग जाता था और मौके पर केस्को की वैन आ जाती थी। कर्मचारी काम पर लग जाते थे। लेकिन जब से सिस्टम ऑनलाइन हुआ है। तब से समस्याओं का समाधान नहीं होता है। हम लोगों को जब कोई समस्या होती है। तो जारी किए गए नंबर पर कॉल लगाते हैं। लेकिन ऑनलाइन नंबर पर कॉल ही नहीं लगती है। बाबूपुरवा सब-स्टेशन के अंतर्गत 7 से 8 बड़े वार्ड आते हैं, केस्को ने सिर्फ 2 से 3 टीमों के हवाले ही हम लोगों की बिजली व्यवस्था सौप दी है। एक टीम में में कुल 3 लोग होते है। जिसमें एक लाइनमैन, टेकनीशियन और हेल्पर होता है। लेकिन इस टीम के पास आने जाने के लिए वैन तक नहीं है। रात के समय केस्को के कर्मचारी पैदल सीढ़ी लेकर आते हैं, तो कई बार आवारा कुत्ते दौड़ा लेते हैं। जिसकी वजह से कई कर्मचारियों के ऊपर कुत्तों ने हमला करके घायल भी कर दिया है। दो महीने से सो नहीं पा रहे, छतों पर आग दहकती है बाबूपुरवा के रहने वाले 62 वर्षीय अतीक अहमद बताते हैं हमारे क्षेत्र में बिजली नाम की कोई चीज ही नहीं बची है। यहां तो लाइट का अलग ही नियम चल रहा है, यहां तो केवल 5 मिनट के लिए लाइट आती है और फिर घंटों के लिए गायब हो जाती है। बच्चे और बड़े रात भर सड़कों पर भागते- फिरते हैं। लेकिन अधिकारियों को कुछ भी नहीं दिखाई देता है। अतीक अहमद आगे बताते हैं, “मैं दो महीने से सही से सो नहीं पा रहा हूं। रात के 2 बजते ही बत्ती गुल हो जाती है। गर्मी इतनी है कि आसमान से आग बरस रही हैं। और छतें आग की तरह दहकती हैं। जब सोने के लिए छत पर पानी छिड़कते हैं तो लगता है, छत से आग निकल रही है। जिसके बाद छोटे-छोटे बच्चे उमस से परेशान हो जाते है, पूरी- पूरी रोते रहते हैं, जिन्हे पूरी रात गोद में लेकर सड़क पर टहलना पड़ता है। बिजली का ऐसा हाल मैंने कभी नहीं देखा, जैसा अब देखने की मिल रहा है। बिजली के संकट से ठप हुआ कारोबार इसी क्षेत्र में बिजली के उपकरणों की रिपेयरिंग करने वाले दुकानदार मकसूद आलम बताते है इस समय लाइट की व्यवस्था सही न होने की वजह से धंधा पूरी तरह चौपट हो गया है। केस्को जानबूझकर बिजली बचाने के लिए रिपेयरिंग की बात कर रहा है। इस समय दुकान पर रिपेयरिंग के लिए आया हुआ सामान लोग उठाने नहीं आ रहे हैं, क्योंकि घर में चलाने के लिए बिजली नहीं आ रही है। केस्को वाले पुराने मीटरों (पोस्टपेड़) को बदलकर जबरन स्मार्ट मीटर लगाने का दबाव बनाते हैं। रीडिंग निकालने आने वाला कर्मी कहता है कि पहले मीटर बदलो, तब बिल निकालेंगे। इस समय भीषण गर्मी में लाइट के बॉक्स बदले जा रहे हैं, जबकि यह काम मौसम ठीक होने पर भी हो सकता था। लेकिन इन लोगों को इससे कोई मतलब ही नहीं है। बुजुर्ग मरीजों का जीना मुहाल इसी क्षेत्र की रहने वाली अफसर बेगम (60) शुगर की मरीज बताती हैं, पूरे दिन में दो-तीन घंटे ही लाइट की सप्लाई मिलती है। अब इस बीमारी की हालत में बगैर पंखे के रहना नरक जैसा है। कुछ समय बाद बकरीद का त्यौहार है। लाइट की सप्लाई सही से नहीं मिल पा रही है। लेकिन हम क्या कर सकते है। अब इन अफसरों को देखना चाहिए।
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30 हजार लोग 2 महीने से रात में जाग रहे:कानपुर में लोग सड़कों पर टहल गुजार रहे रात, बोले- अधिकारी तो AC में आराम से सो रहे