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मुझे राधा-रानी पर भरोसा है। प्रेमानंद महाराज जी जल्द स्वस्थ होंगे। हम सबको आशीर्वाद देंगे। हम लोग परिवार के साथ कोलकाता से महाराजजी के दर्शन के लिए आए हैं। यहां पहुंची तो पता चला कि महाराज जी अभी दर्शन नहीं दे रहे हैं। कोई बात नहीं, अभी हम सब यहां रुककर इंतजार करेंगे। महाराज जी जल्द स्वस्थ होंगे। फिर हम लोग आशीर्वाद लेकर जाएंगे। ये कहना है कोलकाता से करीब 1400 किमी दूर वृंदावन आई महिला श्रद्धालु जूही भावनी का। उन्होंने कहा कि प्रेमानंद महाराज जी का दर्शन कर, आशीर्वाद लेकर ही हम लोग वापस जाएंगे। ऐसे ही राजस्थान, असम, हरियाणा, उत्तराखंड, बिहार समेत कई राज्यों के भक्त प्रेमानंद महाराज के दर्शन पाने और एकांतिक वार्तालाप में शामिल होने की आस लिए वृंदावन पहुंचे हैं। 17 मई यानी 10 दिन से प्रेमानंद महाराज की रात्रि पदयात्रा बंद है। शिष्यों ने तब बताया था कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है। वह पहले की तरह भक्तों से एकांतिक मुलाकात भी नहीं कर रहे हैं। सिर्फ बृजवासी शरणागत शिष्यों से ही एकांतिक मुलाकात कर रहे हैं। प्रेमानंद महाराज की दोनों किडनी खराब हैं। उनकी हफ्ते में 2-3 बार डायलिसिस हो रही है। इस बीच दैनिक भास्कर ने प्रेमानंद के वृंदावन स्थित आश्रम का हाल जाना, वहां पहुंचे भक्तों से बात की। पढ़िए विस्तार से–
संत की भावुक अपील- हम मिलें न मिलें, सबको प्यार करते हैं प्रेमानंद का सोमवार को एक वीडियो सामने आया, जिसमें उन्होंने अपने अनुयायियों से भावुक अपील की। कहा- “बिल्कुल चिंता मत करो। हम मिलें न मिलें, बोलें न बोलें, हम आप सबको बहुत प्यार करते हैं। अंतिम बात यही कि चिंता नहीं करनी। न ये चिंता करनी है कि कैसे हमारा उत्थान होगा। बिना बोले तुम्हारे दिमाग में हम होंगे।” ये भावुक संदेश सामने आने के बाद उनके भक्तों में निराशा दिख रही है। दर्शन करने आने वाले भक्त स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं। शरणागत बृजवासी शिष्य कौन, जिनसे संत मिल रहे प्रेमानंद महाराज के आश्रम में “शरणागत बृजवासी शिष्य” उन भक्तों को कहा जाता है, जिन्होंने खुद को पूरी तरह गुरु और राधा-कृष्ण भक्ति के मार्ग में समर्पित कर दिया हो और जो स्थायी रूप से वृंदावन या ब्रज क्षेत्र में रहकर साधना, सेवा और आश्रम से जुड़े नियमों का पालन करते हों। यह कोई सरकारी या कानूनी पद नहीं होता, बल्कि आश्रम और भक्ति परंपरा में इस्तेमाल होने वाला धार्मिक शब्द है। “शरणागत” का मतलब होता है गुरु की शरण में समर्पित होना, जबकि “बृजवासी” से आशय ब्रज क्षेत्र में रहने वाले भक्तों से है। ऐसे शिष्य आमतौर पर लंबे समय से आश्रम से जुड़े होते हैं और नियमित सेवा-भजन में शामिल रहते हैं। ऐसे ही सीमित शरणागत बृजवासी शिष्यों से इन दिनों प्रेमानंद महाराज एकांतिक वार्तालाप कर रहे हैं। टोकन लेने के लिए पहुंचे भक्त मायूस दिखे संत प्रेमानंद राधा केली कुंज आश्रम में एकांतिक वार्तालाप करते हैं। इस वार्तालाप में शामिल होने के लिए आम भक्तों को एक दिन पहले लाइन में लगकर टोकन लेना होता है। हालांकि, इन दिनों एकांतिक वार्तालाप सिर्फ बृजवासी शरणागत शिष्यों के लिए ही चल रही है। बाहर से आकर टोकन लेकर एकांतिक वार्तालाप की व्यवस्था बंद है। दैनिक भास्कर की टीम आश्रम पहुंची तो वहां टोकन लेने के लिए भक्तों की भीड़ दिखी। इन्हें आश्रम के सेवादार समझा रहे थे। प्रेमानंद के दर्शन न होने पर भक्त मायूस दिखे। वे राधा-रानी से महाराज जी के जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे थे। अब भक्तों की बात पढ़िए राजस्थान के जालम सिंह बोले- गुरुदेव हृदय के अंदर ही मिलेंगे करीब 560 किमी दूर पाली राजस्थान से वृंदावन आश्रम आए भक्त जालम सिंह ने कहा- संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन के लिए आए हैं। मुलाकात नहीं हुई। दर्शन और एकांतिक वार्तालाप बंद है। मोबाइल पर ही महाराज जी की बातें सुनने को मिल रही हैं। प्रेमानंद के भावुक संदेश पर जालम सिंह ने कहा- ध्यान करेंगे तो गुरुदेव हृदय के अंदर ही हैं। गुरुदेव ने जो ज्ञान के रास्ते बताए हैं, उसके हिसाब से चलेंगे तो गुरुदेव हृदय के अंदर ही मिलेंगे। 2 हजार किमी दूर से आए भक्त बोले- भगवान गुरुदेव को स्वस्थ करें करीब 2 हजार किमी दूर असम से वृंदावन आए भक्त ओमप्रकाश ने कहा- महाराज जी मेरे सर्वेसर्वा हैं। उनका जो वीडियो आया है, उसमें वह बताना चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा राधा नाम से जुड़ें। नाम जप करें। इससे आपको दुखों से निवृत्ति मिलेगी। उनके स्वास्थ्य के बारे में आम पब्लिक बहुत चिंतित है। मन से भगवान से प्रार्थन कर रहे हैं कि जल्द से जल्द हमारे गुरुदेव को स्वास्थ्य लाभ प्रदान करें। सेवादार बोले- पूरा वीडियो सुनकर महाराज जी के भाव समझिए वृंदावन स्थित केली कुंज आश्रम में दैनिक भास्कर की टीम ने पूछताछ काउंटर पर मौजूद सेवादारों से बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने ऑन कैमरा कुछ भी कहने से हाथ जोड़कर इनकार कर दिया। हालांकि ऑफ कैमरा बातचीत में एक सेवादार ने बताया कि फिलहाल प्रेमानंद महाराज दर्शन नहीं दे रहे हैं और एकांतिक भजन में लीन हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि लोग पूरा वीडियो सुनें, तभी महाराज जी का भाव सही तरह से समझ पाएंगे। उन्होंने बताया कि यह वीडियो आश्रम के ‘श्री हित राधा कृपा’ यूट्यूब चैनल पर भी उपलब्ध है। 2 किमी पैदल चलकर जाते थे महाराज प्रेमानंद महाराज स्वस्थ रहने पर वृंदावन में श्रीकृष्ण शरणम् सोसाइटी से रमणरेती स्थित आश्रम हित राधा केली कुंज के लिए निकलते थे। 2 किमी पैदल चलकर जाते थे। उनके दर्शन के लिए रात को हजारों की संख्या में भक्त पहुंचते थे। आम दिनों में यह संख्या 20 हजार के करीब होती है। वीकेंड पर दर्शन करने वाले भक्तों की संख्या लाखों में पहुंच जाती है। वहीं, बड़े पर्वों पर 3 लाख से ज्यादा हो जाती है। अब पढ़ते हैं प्रेमानंद की बीमारी के बारे में 2006 में पेट में दर्द हुआ तो पता चला किडनी खराब हैं प्रेमानंद महाराज को पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज की बीमारी है। इसकी जानकारी 19 साल पहले 2006 में उनको तब हुई जब उनके पेट में दर्द हुआ। वह कानपुर में डॉक्टर को दिखाने पहुंचे। डॉक्टर ने उन्हें बताया कि उनको किडनी की आनुवांशिक बीमारी है। फिर वह दिल्ली गए। वहां एक डॉक्टर को दिखाया। डॉक्टर ने उन्हें बताया कि उनकी दोनों किडनी खराब हैं। जीवन सीमित है। इसके बाद वह वृंदावन आ गए। पहले वह काशी रहे और शिव भक्ति की। वृंदावन में उन्होंने राधा नाम का जप शुरू किया। तब से वह लगातार राधा नाम का जप कर रहे हैं। प्रेमानंद जी महाराज ने अपनी किडनी का नाम कृष्णा और राधा रखा है। फ्लैट में ही होती है डायलिसिस प्रेमानंद महाराज वृंदावन की श्री कृष्ण शरणम् सोसाइटी में रहते हैं। इस सोसाइटी में उनके 2 फ्लैट, 209 और 212 उनके पास हैं। इनमें से एक फ्लैट में वह रहते हैं। जबकि दूसरे फ्लैट में डायलिसिस का इंतजाम है। इसी फ्लैट में उनका डायलिसिस होता है। किडनी की बीमारी से जूझ रहे संत प्रेमानंद महाराज की पहले कभी-कभी डायलिसिस होती थी। फिर यह हफ्ते में होने लगी। इसके बाद कभी 3 दिन, कभी 5 दिन और कभी-कभी हर दिन होती है। डायलिसिस की यह प्रक्रिया 4 से 5 घंटे चलती है। अब संत प्रेमानंद महाराज की कहानी 13 साल की उम्र में घर छोड़ा
प्रेमानंद महाराज का जन्म यूपी में कानपुर जिले की नरवल तहसील के अखरी गांव में हुआ था। पिता शंभू नारायण पांडे और मां रामा देवी हैं। 3 भाई हैं, प्रेमानंद मंझले हैं। बचपन में प्रेमानंद जी का नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे था। वह बचपन से ही आध्यात्मिक रहे। कक्षा 8 तक पढ़ाई की है। बचपन में अनिरुद्ध ने अपनी सखा टोली के साथ शिव मंदिर के लिए एक चबूतरा बनाना चाहा। इसका निर्माण भी शुरू करवाया, लेकिन कुछ लोगों ने रोक दिया। इससे वह मायूस हो गए। उनका मन इस कदर टूटा कि घर छोड़ने का फैसला कर लिया। वह कानपुर होते हुए काशी पहुंचे। जब 13 साल के हुए तो उन्होंने ब्रह्मचारी बनने का फैसला किया। शुरुआत में प्रेमानंद महाराज का नाम ‘आरयन ब्रह्मचारी’ रखा गया। काशी में उन्होंने करीब 15 महीने बिताए। उन्होंने गुरु गौरी शरण जी महाराज से गुरुदीक्षा ली। फिर वह मथुरा आ गए। संन्यासी से राधावल्लभी संत बन गए प्रेमानंद महाराज प्रेमानंद महाराज वृंदावन पहुंचकर हर रोज बांके बिहारी जी के दर्शन करते। फिर रासलीला रास आई और राधावल्लभ के कार्यक्रमों में जाने लगे। वहां घंटों खड़े रहते। एक दिन एक संत ने श्री राधारससुधानिधि से एक श्लोक पढ़ा, लेकिन महाराज उसे समझ नहीं पाए। फिर एक दिन वृंदावन की परिक्रमा करते समय एक सखी को एक श्लोक गाते हुए सुना। उसे सुनकर महाराज ठिठक गए। श्लोक ऐसा रास आया कि अपना संन्यास धर्म तोड़कर वो उस सखी के पास गए। उससे श्लोक का मतलब पूछा। सखी ने कहा- इसका मतलब समझने के लिए राधावल्लभी होना जरूरी है। इस तरह महाराज राधावल्लभी हो गए। ———————————— ये खबर भी पढ़िए- यूपी में बिजली संकट से आक्रोश, भाजपा विधायक सहमे: ऊर्जा मंत्री को चिट्ठियां लिख रहे, एक्शन में योगी; जानिए कटौती मजबूरी क्यों यूपी में एक तरफ पारा रोज नए रिकॉर्ड छू रहा है, वहीं शहर से लेकर गांव तक ‘पावर कट’ से जनता में हाहाकार है। यूपी पावर कॉरपोरेशन (UPPCL) ने 30 हजार मेगावाट से ज्यादा बिजली सप्लाई करके रिकॉर्ड बनाया। लेकिन, लोगों की जरूरत भर की बिजली नहीं दे पा रहा है। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के डर से भाजपा के अपने विधायक भी इस कदर सहमे हुए हैं कि वे ऊर्जा मंत्री को सीधे चिट्ठियां लिख रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर…
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प्रेमानंद महाराज सिर्फ शरणागत शिष्यों से ही मिल रहें:10 दिन से तबीयत खराब, पदयात्रा रुकी, 1400 किमी दूर से पहुंचे भक्त बोले- रुककर इंतजार करेंगे