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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म मामले में दोषी करार पूर्व भाजपा विधायक रामदुलारे की रेप केस में सशर्त जमानत मंजूर कर ली है किन्तु दोषसिद्धि निलंबित करने से इंकार कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजबीर सिंह ने सजा के खिलाफ अपील में दाखिल अर्जी को स्वीकार करते हुए दिया है। 2023 में दोषी पाया गया था अपर सत्र न्यायाधीश, सोनभद्र ने 15 दिसंबर 2023 को पूर्व विधायक को अपराध का दोषी करार दिया था।उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और 506 के साथ-साथ पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(ठ)/6 के तहत 25 साल के कठोर कारावास और 10 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। इस फैसले के खिलाफ अपील दायर की गई है। बचाव पक्ष ने पीड़िता की उम्र, घटना में देरी से प्राथमिकी दर्ज करने और पीड़िता के गर्भवती होने के दावों पर सवाल उठाए और इन्हें संदिग्ध बताया। सजा का निलंबन और दोषसिद्धि पर रोक अलग राज्य सरकार के वकील ने कहा कि ट्रायल कोर्ट का फैसला सबूतों पर आधारित है और पीड़िता के बयान तथा अन्य मेडिकल रिपोर्ट उसके आरोपों की पुष्टि करते हैं। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि सजा का निलंबन और दोषसिद्धि पर रोक दो अलग-अलग चीजें हैं। अदालत ने पाया कि रामदुलारे ने अपनी अर्जी में ऐसा कोई विशेष कारण या परिणाम नहीं बताया जो उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगाने के लिए आधार बन सके, सिवाय इसके कि वे विधानसभा के सदस्य थे और अपनी सदस्यता खो चुके हैं। अदालत ने कहा कि केवल नौकरी या पद खोने का डर ही दोषसिद्धि पर रोक लगाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है। न्यायालय ने मामले की गंभीरता, अपीलकर्ता द्वारा बिताई गई जेल की अवधि और अपील के जल्द निपटारे की कम संभावना को देखते हुए उन्हें जमानत देने का निर्णय लिया। आदेश के अनुसार, रामदुलारे को व्यक्तिगत बांड और दो जमानतदारों (जिसमें से एक परिवार का सदस्य हो) के साथ रिहा किया जाएगा। साथ ही, ट्रायल कोर्ट द्वारा लगाए गए जुर्माने की 50% राशि की वसूली पर अपील के लंबित रहने तक रोक लगा दी गई है। मामले की अगली सुनवाई अगस्त 2026 में निर्धारित की गई है।
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पूर्व भाजपा विधायक रामदुलारे को रेप केस में जमानत:हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि पर रोक से इंकार किया, कहा सजा पर रोक और दोष अलग