निजी स्कूलों में आरटीई प्रवेश लटकने पर डीएम सख्त:आगरा में 2000 से ज्यादा गरीब बच्चों के दाखिले अब तक अधूरे


आगरा में आरटीई के तहत गरीब बच्चों के प्रवेश में लापरवाही पर जिला प्रशासन ने अब कड़ा रुख अपना लिया है। बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी मनीष बंसल ने उन निजी स्कूलों के प्रबंधन और प्रधानाचार्यों को जमकर फटकार लगाई, जिन्होंने लॉटरी से आवंटित बच्चों को अब तक प्रवेश नहीं दिया। डीएम ने साफ कहा कि पात्रता जांच के नाम पर अभिभावकों को स्कूलों के चक्कर लगवाना और गेट से वापस भेजना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने सभी लंबित प्रवेश एक सप्ताह के भीतर हर हाल में पूरा करने के निर्देश दिए और चेतावनी दी कि इसके बाद कार्रवाई सीधे स्कूल प्रबंधन पर होगी। बैठक में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा ऐसे करीब 50 स्कूलों की सूची प्रस्तुत की गई, जहां आवंटित बच्चों को प्रवेश नहीं मिला है। समीक्षा के दौरान सामने आया कि सुमित राहुल गोयल मेमोरियल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सिंपकिंस सीनियर सेकेंडरी स्कूल, द इंटरनेशनल स्कूल आगरा, होली पब्लिक स्कूल सिकंदरा और गायत्री पब्लिक स्कूल समेत कई स्कूलों में आवंटित बच्चों के मुकाबले शून्य प्रवेश हुआ है। इस पर डीएम ने कड़ी नाराजगी जताते हुए स्कूल प्रबंधन से जवाब तलब किया। बैठक में कुछ स्कूलों ने गलत दस्तावेज लगाने और अभिभावकों के स्कूल न आने की बात कही, लेकिन जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि किसी बच्चे की पात्रता जांचना स्कूल का अधिकार नहीं है। उन्होंने निर्देश दिए कि पहले बच्चे का प्रवेश लिया जाए, बाद में यदि कोई शिकायत हो तो प्रशासन को सूचित किया जाए। डीएम ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर अभिभावकों से अंडरटेकिंग ली जा सकती है, लेकिन प्रवेश रोकना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं होगा। जिले में आरटीई के तहत वर्ष 2026-27 में 8112 बच्चों का आवंटन किया गया है, लेकिन अब तक केवल करीब 6100 बच्चों का ही दाखिला हो सका है। इस पर जिलाधिकारी ने कड़ा संज्ञान लेते हुए बीएसए को रोजाना मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई स्कूल अभिभावकों को परेशान करता मिला या प्रवेश देने से मना करता पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी प्रतिभा सिंह, बीएसए जितेंद्र कुमार गोंड, एआरटीओ आलोक अग्रवाल समेत सभी खंड शिक्षा अधिकारी और निजी स्कूलों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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