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आगरा में मंगलवार को पार्वती घाट पर यमुना में नहाने गए 4 बच्चों की डूबकर मौत हो गई। हादसे के वक्त दो गोताखोरों ने जान पर खेलकर दो बच्चों को बचा लिया। लेकिन तीन अन्य बच्चों को बचाने से पहले ही वे गहरे पानी में समा गए। जिस जगह हादसा हुआ, वहां से बच्चों के घर की दूरी 1 किलोमीटर भी नहीं है। सुरक्षा इंतजाम शून्य, हर साल जाती हैं जानें आगरा में यमुना में नहाने के दौरान डूबकर मौत का यह पहला मामला नहीं है। पहले भी कई लोग यमुना में समा चुके हैं। इसके बावजूद जिला प्रशासन ने अब तक कोई सुरक्षा इंतजाम नहीं किए। यमुना के घाटों पर न तो चेतावनी बोर्ड लगे हैं और न ही गोताखोर तैनात हैं। कैलाश घाट से लेकर दशहरा घाट तक घनी आबादी वाला इलाका है। यहां सबसे ज्यादा हादसों का डर बना रहता है। गर्मी बढ़ते ही लोग यमुना में नहाने के लिए पहुंच जाते हैं। जो तैरना जानते हैं, वे तो बच जाते हैं। लेकिन तैरना न जानने वाले अक्सर हादसे का शिकार हो जाते हैं। पुलिस आती है तब तक देर हो जाती है स्थानीय लोगों का आरोप है कि यमुना में डूबने वालों को बचाने के लिए प्रशासन के पास कोई इंतजाम नहीं हैं। जब तक पुलिस मौके पर पहुंचती है और राहत कार्य शुरू करती है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। लोगों को बचाने के लिए स्थानीय गोताखोर ही यमुना में कूदते हैं। लोगों ने कहा-पुलिस के पास न नाव है, न लाइफ जैकेट। हर बार हादसे के बाद प्रशासन जागता है। दो-चार दिन गश्त होती है, फिर सब भूल जाते हैं।” तैनात हों गोताखोर और नाव
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि गर्मी के मौसम में यमुना घाटों पर स्थायी रूप से गोताखोर और नाव तैनात की जाएं। घाटों पर बड़े-बड़े चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं ताकि लोगों को गहरे पानी का अंदाजा रहे। लोगों का कहना है कि कैलाश घाट, दशहरा घाट और पार्वती घाट सबसे संवेदनशील हैं। यहां रोजाना सैकड़ों लोग नहाने आते हैं। प्रशासन अगर अभी नहीं चेता तो ऐसे हादसे रुकने वाले नहीं हैं। फिलहाल पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। हादसे के बाद पूरे इलाके में मातम पसरा है।
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आगरा में यमुना के घाटों पर सुरक्षा इंतजाम शून्य:चार बच्चों की डूब कर हुई थी मौत, लोग बोले-प्रशासन स्थानीय गोताखोर के भरोसे