वकीलों ने न्यायपालिका, बार काउंसिल की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल:लखनऊ में 'मानवतावादी अधिवक्ता महासभा' सम्मेलन के दौरान लगाए आरोप


लखनऊ के प्रेस क्लब में सोमवार को आयोजित ‘मानवतावादी अधिवक्ता महासभा’ के सम्मेलन में वकीलों ने न्यायपालिका और बार काउंसिल की कार्यप्रणाली पर खुलकर सवाल उठाए। कार्यक्रम में अधिवक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में बार काउंसिल और बार एसोसिएशनों की निष्पक्षता पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। सम्मेलन में बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं की मौजूदगी रही। महासभा के नवनिर्वाचित अध्यक्ष रमा शंकर भीम ने कहा कि बार काउंसिल जैसी संस्थाएं अपनी प्रासंगिकता खोती जा रही हैं और उन पर धनबलियों का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऑल इंडिया बार काउंसिल और यूपी बार काउंसिल सरकार के दबाव में काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि न्यायिक अधिकारियों की दलाली के चर्चे खुलेआम हो रहे हैं, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। एसोसिएशनों में माफियाओं का हस्तक्षेप बढ़ गया सम्मेलन में यह भी कहा गया कि बार एसोसिएशनों में अब राजनीतिज्ञों, प्रॉपर्टी डीलरों और भू-माफियाओं का हस्तक्षेप बढ़ गया है। वक्ताओं ने इसे अधिवक्ता समाज के लिए गंभीर खतरा बताते हुए सुधार की जरूरत पर जोर दिया। अधिवक्ताओं ने कहा कि यदि समय रहते व्यवस्था में बदलाव नहीं किया गया तो न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता कमजोर हो सकती है। न्याय की रक्षा के लिए फिर एकजुट होने का समय सम्मेलन के दौरान अधिवक्ताओं के हितों से जुड़े कई प्रस्ताव भी पारित किए गए। प्रदेश में जल्द ‘एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट’ लागू करने, वकीलों के हड़ताल के अधिकार को सुरक्षित रखने, बार काउंसिल के सदस्यों की संख्या बढ़ाने और निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन की मांग उठाई गई। साथ ही न्यायालय अवमानना अधिनियम के दुरुपयोग से अधिवक्ताओं को बचाने की बात कही गई। वक्ताओं ने कहा कि आजादी की लड़ाई में अधिवक्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और अब संविधान, समता व न्याय की रक्षा के लिए फिर एकजुट होने का समय है। कार्यक्रम में राम प्रकाश वर्मा, मनोज कुमार गुप्ता, सैयद मशकूर आलम, राजेश कुमार रावत समेत कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने विचार रखे।

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