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40 सालों तक बिहार की सत्ता का केंद्र रहा 1, अणे मार्ग का दायरा अब 10 एकड़ से ज्यादा का हो जाएगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मौजूदा आवास 5 देशरत्न मार्ग को उसमें मिलाने का फैसला लिया गया है। दोनों भवनों को जोड़कर सम्राट चौधरी के लिए भव्य महल तैयार किया जाएगा। आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में सम्राट चौधरी के नए महल की खासियतें। चौधरी ने क्यों 5 देशरत्न मार्ग वाले बंगले को नहीं छोड़ा। सवाल-1ः मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नया पता क्या होगा? जवाबः सम्राट चौधरी का नया पता 1, अणे मार्ग मुख्यमंत्री आवास ही होगा। हालांकि, उनको शिफ्ट करने की जरूरत नहीं है। क्योंकि उनके मौजूदा आवास को मुख्यमंत्री आवास में ही अस्थायी तौर पर मिला दिया गया है। मतलब कि अब दोनों आवास एक हो गए हैं। सम्राट चौधरी चाहें तो दोनों को एक में मिलाकर या अलग-अलग इस्तेमाल कर सकते हैं। दोनों बंगले के बीच में सिर्फ एक बाउंड्री का फासला है। 5 मई को सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री आवास का नाम बदलकर लोक सेवक आवास, अणे मार्ग कर दिया है। सवाल-2ः पहले मुख्यमंत्री आवास में क्या-क्या फैसिलिटी थी? जवाबः करीब 6 एकड़ (करीब 2.4 हेक्टेयर) में फैला 1, अणे मार्ग का बंगला पटना के हाई सिक्योरिटी वाले एरिया में है। इसके नजदीक राजभवन और बिहार सचिवालय है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मेन बिल्डिंग में 6 बड़े कमरे हैं, जिनमें VIP सुइट्स, रहने के कमरे और ऑफिस हैं। कैंपस में बड़ा मीटिंग हॉल और प्रशासनिक कक्ष है, जहां कैबिनेट की बैठकें और महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते हैं। 2015 तक इसी कैंपस में मुख्यमंत्री का जनता दरबार लगता था, जिसके लिए अलग से इंफ्रास्टक्चर तैयार किया गया था। बंगले की खासियतें… 1, अणे मार्ग के CM हाउस बनने की कहानी… पहली बार बिन्देश्वरी दुबे रहे नीतीश भी 2 आवास और एक पार्क मिला चुके हैं सवाल-3ः 5 देशरत्न मार्ग वाले बंगले में किस तरह की सुविधा है? जवाबः अब तक यह यह बंगला डिप्टी CM के नाम पर अलॉट किया जाता था। 2015 से अब तक तेजस्वी यादव (दो बार), सुशील कुमार मोदी और तारकिशोर प्रसाद रह चुके हैं। फिलहाल इस बंगले में बतौर डिप्टी CM सम्राट चौधरी रह रहे थे। अक्टूबर 2024 (विजयादशमी) के अवसर पर उन्होंने गृह-प्रवेश किया था। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उसी बंगले में हैं। अब इस बंगले को मुख्यमंत्री आवास में जोड़ दिया गया है। इसका मतलब हुआ कि सम्राट चौधरी बतौर मुख्यमंत्री भी इसी बंगले में रहेंगे। करीब 5 एकड़ में फैले इस बंगले में पहले से मुख्यमंत्री आवास की तरह ही एक कैंप कार्यालय है। जहां से सम्राट अपने विभाग और जनता से जुड़े कार्यों का निपटारा करते हैं। विवादों में भी रहा बंगला सवाल-4ः सम्राट चौधरी ने डिप्टी CM वाला आवास क्यों नहीं छोड़ा? जवाबः इस बंगले को लेकर राजनीतिक हलकों में ‘वास्तु दोष’ की चर्चा रहती है, क्योंकि 2015 के बाद से यहां रहने वाला कोई भी डिप्टी CM अपना 5 साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया है। सम्राट चौधरी जब इस बंगले में शिफ्ट हुए तब उन्होंने वास्तु दोष को दूर करने के लिए बंगले के पुराने गेट को स्थायी रूप से बंद करवाकर नया प्रवेश द्वार बनवाया है। सवाल-5ः क्या कोई मुख्यमंत्री अपनी मर्जी से CM हाउस में बदलाव कर सकता है? जवाबः बिल्कुल। पॉलिटिकल एनालिस्ट केके लाल कहते हैं, ‘बिहार में मुख्यमंत्री आवास के रेनोवेशन के लिए मुख्य जिम्मेदारी भवन निर्माण विभाग के पास होती है। यह विभाग राज्य सरकार के अधीन है। इस विभाग के पास सरकारी भवनों की देखभाल, मरम्मत, रेनोवेशन और निर्माण की जिम्मेदारी होती है।’ CM हाउस के रेनोवेशन के लिए वित्त विभाग की ओर से बजट जारी किया जाता है। इसके लिए सरकारी खजाने से खर्च की इजाजत ली जाती है। वित्त विभाग ही रेनोवेशन के सभी खर्चों का ब्योरा रखता है।’ केके लाल बताते हैं, ‘देश में मुख्यमंत्री आवास के रेनोवेशन के लिए कोई भी कानून या नियम नहीं है। सभी राज्य के मुख्यमंत्रियों को अपनी लाइफस्टाइल के तहत घर में रेनोवेशन कराने की आजादी है। कुछ लोग बहुत सादगी से रहते हैं, तो कुछ लोगों को लग्जरी पसंद है। इस कारण किसी भी राज्य में जब कोई नया मुख्यमंत्री बनता है, तो वो सरकारी आवास को अपनी पसंद के मुताबिक रेनोवेट और डेकोरेट करवा सकता है।’
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10 एकड़ में फैले ‘शीशमहल’ में रहेंगे सम्राट:स्पेनिस ग्रेनाइड, मकराना के संगमरमर से बने घर को मुख्यमंत्री आवास में मिलाया; जानें अंदर क्या-क्या है