गौरैया संस्कृति संस्थान की पहल, लोकसंस्कृति का संरक्षण:कार्यशाला के चौथे दिन प्रतिभागियों में दिखा उत्साह


पारंपरिक लोकसंस्कृति को सहेजने की दिशा में रंजना मिश्रा की पहल रंग ला रही है। गौरैया संस्कृति संस्थान द्वारा आयोजित कार्यशाला के चौथे दिन प्रतिभागियों में खासा उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम में वरिष्ठ लोकगायिका इन्दिरा श्रीवास्तव ने प्रतिभागियों को बधाई गीत और दादरा की बारीकियां सिखाईं। कार्यशाला के दौरान ‘ननद मोरी आइ गई लै के बधावा’, ‘उई रनियां…’ और ‘नजरिया ऐसी लगी…’ जैसे पारंपरिक अवधी गीतों की प्रस्तुति और अभ्यास कराया गया। इसके साथ ही नकटा और ‘मैं जालिम चोर बजनी…’ जैसे गीतों का प्रशिक्षण भी दिया गया। विलुप्त होती लोकपरंपराओं को सहेजने की यह पहल प्रतिभागियों के लिए खास अनुभव बन रही है। 11 पारंपरिक गीत सिखाए जाएंगे संस्थापक रंजना मिश्रा ने बताया कि 5 मई से गोमतीनगर के वास्तुखंड में पांच दिवसीय विशेष कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी, जिसमें बधाई गीत, दादरा, सोहर, नकटा, सरिया और लोक भजन जैसी विधाओं में करीब 11 पारंपरिक गीत सिखाए जाएंगे। उनका उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है। संस्थान के उपाध्यक्ष अमित ने बताया कि कार्यशाला में अल्पना श्रीवास्तव, रमा सिंह, रीना सिंह, सुनीता निगम, लता तिवारी, डॉ. सुषमा रस्तोगी समेत करीब 30 महिलाएं भाग ले रही हैं। सभी प्रतिभागियों में लोकसंस्कृति को सीखने और आगे बढ़ाने का उत्साह साफ दिखाई दे रहा है। संस्था ने इच्छुक लोगों से संपर्क कर इस पहल से जुड़ने की अपील भी की है।

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