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गोरखपुर की नदियों और पानी के स्रोतों को बचाने के लिए रविवार को प्रेस क्लब में सम्मेलन हुआ। “पानी की बात, आपके साथ” विषय पर हुए इस कार्यक्रम में आमी नदी समेत नदियों, तालाबों और झीलों को गंदा होने और कब्जे से बचाने के लिए बड़ा अभियान शुरू करने का फैसला लिया गया। इसमें लोगों को साथ लेकर काम करने पर जोर दिया गया। सम्मेलन में तय हुआ कि आगे नदियों और पानी के स्रोतों के किनारे जल पंचायतें की जाएंगी। इन पंचायतों में लोगों को पानी बचाने और नदियों की हालत के बारे में बताया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि जब तक आम लोग साथ नहीं आएंगे, तब तक नदियों को बचाना मुश्किल होगा। पानी के प्रदूषण से बढ़ रही परेशानी मुख्य अतिथि प्रो. शरद चंद्र मिश्र ने कहा कि पानी गंदा होने से आर्सेनिक जैसी खतरनाक दिक्कतें बढ़ रही हैं। इससे लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि समय रहते इसे रोकना जरूरी है। वरिष्ठ पत्रकार मनोज सिंह ने कहा कि नदियों के गंदा होने का सबसे ज्यादा असर आम लोगों पर पड़ रहा है, लेकिन इस पर सही ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अब संघर्ष तेज करने की बात वक्ताओं ने कहा कि आमी जैसी नदियों को बचाने के लिए काफी समय से कोशिश हो रही है, लेकिन अभी तक बड़ा बदलाव नहीं दिखा है। विश्वविजय सिंह ने कहा कि अगर यही हाल रहा तो आगे पानी की बड़ी समस्या हो सकती है। अनुज अस्थाना ने कहा कि जरूरत पड़ी तो इस मुद्दे पर कानूनी लड़ाई भी लड़ी जाएगी। अशोक चौधरी ने कहा कि लोगों का साफ पानी पाने का हक भी प्रभावित हो रहा है। वहीं, इस सम्मेलन में “जन आयोग” बनाने का फैसला लिया गया। यह आयोग नदियों को साफ रखने, उनके बहाव को सही बनाए रखने और उन पर निर्भर लोगों के हितों की रक्षा के लिए काम करेगा।
सम्मेलन में आमी नदी को गंदा करने वाले उद्योगों पर कार्रवाई, सीईटीपी लगाने, नदियों से कब्जा हटाने, तालाब और झील की जमीन पर योजनाओं पर रोक लगाने जैसे फैसले लिए गए। साथ ही नदी किनारे रहने वाले लोगों के पुनर्वास की मांग भी उठाई गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. संत पूज्य हरिशरण शास्त्री ने की और संचालन विक्रांत साहनी ने किया। सम्मेलन में कई सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
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गोरखपुर में नदियों को बचाने का अभियान शुरू:जल पंचायतों से जुड़ेंगे लोग, प्रदूषण-अतिक्रमण रोकने की अपील