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केजीएमयू के जनरल सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने सर्जरी कर मरीज के सीने से 2.5 किलो का ट्यूमर निकालकर नई जिंदगी दी है। ट्यूमर इतना बड़ा था कि मरीज का दायां फेफड़ा पूरी तरह सिकुड़ गया था और दिल व मुख्य धमनी (एओर्टा) पर दबाव बना हुआ था। इसके ऑपरेशन में डॉक्टरों की टीम को करीब पांच घंटे का लंबा समय लगा है। डॉक्टरों ने बताया कि शुरुआत में कई अस्पतालों में मरीज का इलाज टीबी और अन्य फेफड़ों के ट्यूमर समझकर किया जाता रहा था। सांस फूलने से शुरू हुई परेशानी मरीज शगुन यादव को जून 2025 में पहली बार सांस फूलने और दिल की धड़कन तेज होने की शिकायत हुई थी। स्थानीय डॉक्टर जनवरी 2026 तक सामान्य दवाओं से इलाज करते रहे, लेकिन बीमारी की सही वजह जानने के लिए कोई विशेष जांच नहीं कराई गई। जनवरी 2026 में जब पहली बार छाती का एक्स-रे कराया गया तो दायां फेफड़ा पूरी तरह सफेद (व्हाइट-आउट) दिखाई दिया। इसके बाद एक निजी अस्पताल में सीने में आईसीडी ट्यूब डालकर पानी निकाला गया और टीबी मानते हुए दवाएं शुरू कर दी गईं। टीबी का इलाज बेअसर, हालत बिगड़ती गई टीबी की दवा के बावजूद मरीज को कोई राहत नहीं मिली। उल्टा बुखार, उल्टी और कमजोरी बढ़ती गई। मार्च 2026 में सीने में फिर मवाद भर गया। इसके बाद विवेकानंद पॉलीक्लिनिक में भर्ती किया गया, जहां सीटी स्कैन और बायोप्सी के आधार पर इसे पल्मोनरी हैमाटोमा बताया गया और फेफड़े का हिस्सा निकालने की सर्जरी की सलाह दी गई।लगातार बिगड़ती हालत के बाद 6 अप्रैल 2026 को मरीज को केजीएमयू के जनरल सर्जरी विभाग लाया गया। यहां प्रो सुरेश कुमार की टीम ने रिपोर्ट्स की दोबारा समीक्षा की और जर्म सेल ट्यूमर (टेराटोमा) की आशंका जताई। दोबारा सीटी स्कैन और बायोप्सी में पुष्टि हुई कि मरीज को मैच्योर टेराटोमा है। यह ट्यूमर सीने के अगले हिस्से (एंटीरियर मेडियास्टिनम) में था और इतना बड़ा हो चुका था कि दिल की धड़कन 150 प्रति मिनट तक पहुंच गई थी। 5 घंटे चली सर्जरी कार्डियोलॉजी और एनेस्थीसिया विभाग की मंजूरी के बाद 21 अप्रैल 2026 को प्रो सुरेश कुमार की टीम ने ऑपरेशन किया। डॉक्टरों के मुताबिक जैसे ही ट्यूमर हटाया गया, दबाव खत्म होने पर मरीज का सिकुड़ा हुआ दायां फेफड़ा फिर से पूरी तरह फैल गया। ऑपरेशन के बाद मरीज को आईसीयू में रखा गया। हालत तेजी से सुधरने पर 9 वें दिन सीने की नली हटाई गई और डिस्चार्ज की प्रक्रिया पूरी की गई। मरीज ने कहा- डॉक्टरों ने नया जीवन दिया मरीज शगुन यादव ने कहा कि वह पिछले एक साल से सांस लेने में तकलीफ, बुखार, थकान और सीने के दर्द से परेशान थीं। कई जगह इलाज के बावजूद आराम नहीं मिला। केजीएमयू में सही बीमारी का पता चला और डॉक्टरों ने जटिल सर्जरी कर मुझे नया जीवन दिया। मैं पूरी टीम की आभारी हूं। परिवार ने जताया आभार शगुन की बहन मुस्कान यादव और पिता विमल कुमार यादव ने कहा कि लंबे समय तक गलत इलाज के कारण हालत बिगड़ती रही, लेकिन केजीएमयू पहुंचने के बाद सही निदान और समय पर सर्जरी से उनकी बेटी और बहन को नया जीवन मिला। डॉक्टरों के मुताबिक टेराटोमा एक दुर्लभ जर्म सेल ट्यूमर है, जो समय पर पहचान न होने पर जानलेवा हो सकता है। इस मामले में ट्यूमर फेफड़े, दिल और बड़ी रक्त वाहिकाओं पर दबाव डाल रहा था, इसलिए सर्जरी बेहद चुनौतीपूर्ण थी।
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केजीएमयू डॉक्टरों ने सीने से निकाला 2.5 किलो का ट्यूमर:महीनों तक टीबी समझकर होता रहा इलाज, ऑपरेशन में लगे पांच घंटे