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नागपुर2 घंटे पहले
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छत्रपति शिवाजी महाराज और समर्थ रामदास स्वामी के बारे में अपनी टिप्पणी को लेकर विवादों में घिरे बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने माफी मांग ली।
रविवार को नागपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस में धीरेंद्र शास्त्री ने कहा- कुछ लोगों ने मेरे बयान का गलत अर्थ निकाला। मैं जिस स्वराज और हिंदू राष्ट्र की अवधारणा का सम्मान करता हूं, उसमें छत्रपति शिवाजी महाराज का स्थान सर्वोच्च है। उनके बारे में नकारात्मक बोलना तो दूर, मैं ऐसा सपने में भी नहीं सोच सकता।
उन्होंने आगे कहा- संदर्भ बिल्कुल अलग था। छत्रपति शिवाजी महाराज की संतों और अपने गुरु समर्थ रामदास स्वामी के प्रति गहरी निष्ठा थी। हम एक शिष्य की अपने गुरु के प्रति भक्ति के बारे में बात कर रहे थे। ठीक वैसे ही जैसे महाभारत में अर्जुन ने भगवान कृष्ण से कहा कि वह अपने ही लोगों से युद्ध नहीं करेंगे, तब कृष्ण ने गीता का उपदेश दिया था।
हमारा उद्देश्य केवल छत्रपति शिवाजी महाराज महानता को उजागर करना था कि वे संतों के प्रति कितने गहरे रूप से समर्पित थे, लेकिन एक छोटा सा अंश संदर्भ से काटकर फैला दिया गया।

धीरेंद्र शास्त्री नागपुर में विश्व के पहले ‘भारतदुर्गा मंदिर’ के शिलान्यास समारोह में हुए थे शामिल।
क्या था विवादित बयान? नागपुर के एक कार्यक्रम में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने शिवाजी महाराज को लेकर एक दावा किया था। उन्होंने कहा था कि शिवाजी महाराज युद्धों से थक गए थे। उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों को त्यागने की इच्छा जताई थी। शास्त्री के अनुसार, महाराज अपना मुकुट लेकर गुरु समर्थ रामदास के पास पहुंचे थे।
शिवाजी महाराज ने अपना मुकुट उनके चरणों में रख दिया था। शास्त्री ने यह भी कहा था कि तब गुरु रामदास ने मुकुट वापस शिवाजी के सिर पर रखा और उन्हें सिखाया कि थकान के बावजूद अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करना ही सच्ची सेवा है।

मैं तो संतों के प्रति महाराज की भक्ति बता रहा था: धीरेंद्र शास्त्री
प्रेस कॉन्फ्रेंस में धीरेंद्र शास्त्री ने आगे कहा- कुछ लोगों ने मेरे बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया। हम उन लोगों की आलोचना कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे, जिनके स्वराज्य ने हमें ‘हिंदू राष्ट्र’ स्थापित करने के लिए प्रेरित किया। मैंने अपने शब्दों में महाराज और संतों के प्रति अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का प्रयास किया था।
उन्होंने कहा- छत्रपति शिवाजी महाराज में आस्था रखने वाले सभी लोग हमारे अपने हैं। अगर हम ऐसे मुद्दों पर आपस में बहस करेंगे, तो इससे केवल दूसरों को ही फायदा होगा। मेरा किसी के प्रति कोई गलत इरादा नहीं था, लेकिन अगर मैंने किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है, तो मैं माफी मांगता हूं। उन्होंने कहा कि मैं तो संतों के प्रति महाराज की भक्ति बता रहा था।

नागपुर के कार्यक्रम में संतों के साथ-साथ RSS चीफ मोहन भागवत, केंद्रीय मंत्री गडकरी और महाराष्ट्र के सीएम फडणवीस भी मौजूद रहे।
राजनीतिक घमासान भी मचा
- पूर्व राज्यसभा सदस्य संभाजीराजे छत्रपति ने कहा-जिस मध्यप्रदेश से शास्त्री आते हैं, वहां के महान योद्धा छत्रसाल बुंदेला ने शिवाजी महाराज से ही प्रेरित होकर मुगलों के खिलाफ जंग जीती थी। संभाजीराजे ने शास्त्री के ज्ञान पर सवाल उठाते हुए उन्हें अपने ही राज्य का इतिहास न जानने वाला बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे पाखंडी बाबाओं के कार्यक्रमों पर राज्य में रोक लगाई जाए।
- महाराष्ट्र के कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने इसे इतिहास बदलने की साजिश बताया। उन्होंने नितिन गडकरी और देवेंद्र फडणवीस से भी माफी की मांग की। फडणवीस ने इस पर कहा कि इतिहास की किताबों में ऐसा कोई प्रसंग नहीं मिलता। उन्होंने लोगों से जिम्मेदारी से व्यवहार करने की अपील की।
- कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार और हर्षवर्धन सपकाल ने इसे ‘इतिहास का विकृत रूप’ बताया है। शिवसेना (UBT) के प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि शिवाजी महाराज एक संप्रभु शासक थे और यह कहना कि उन्होंने अपना राज्य किसी और को सौंप दिया था, एक ऐतिहासिक पाप है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ऐसे बयानों के लिए मंच मुहैया करा रही है।
- एनसीपी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने बाबा के महाराष्ट्र में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जब यह बयान दिया जा रहा था, तब राज्य के सत्ताधारी नेता मंच पर मौजूद थे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने कार्रवाई नहीं की, तो जनता खुद उन्हें सबक सिखाएगी।

धीरेंद्र शास्त्री ने रविवार को नागपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने बयानों पर स्पष्टीकरण दिया।
चारों बच्चों वाले बयान पर भी दिया स्पष्टीकरण नागपुर में उसी कार्यक्रम में धीरेंद्र शास्त्री ने कहा था कि हर किसी को चार बच्चे पैदा करने चाहिए और उनमें से एक को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को देना चाहिए। उनके इस बयान पर भी काफी विवाद में रहा।
धीरेंद्र शास्त्री ने इस पर भी स्पष्टीकरण देते हुए कहा- संघ को पुत्र देने का अर्थ है उसे राष्ट्रवादी बनाना। चाहे वह कलेक्टर हो, शिक्षक हो या कुछ और, मेरा इरादा यही था कि बच्चे सनातनी विचारधारा के हों। शास्त्री ने यह भी कहा की कि वे भविष्य में विवाह करेंगे। उन्होंने कहा कि वे स्वयं भी हिंदू आबादी बढ़ाने में योगदान देंगे।
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