बिना टिकट ले जाने वाले बस कंडक्टर की बर्खास्तगी बरकरार:59 यात्रियों को बिना टिकट सफर कराया, याचिका खारिज


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बस कंडक्टर की बर्खास्तगी को सही ठहराते हुए कहा है कि बिना टिकट यात्रियों को ले जाना गंभीर कदाचार है और ऐसे कर्मचारी को सेवा में बनाए रखना उचित नहीं है।
जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि कंडक्टर के खिलाफ विभागीय कार्यवाही पूरी प्रक्रिया के अनुसार की गई और उसे अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया गया। इसलिए अदालत हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं देखती। फैजाबाद-अकबरपुर के बीच की बस मामले के अनुसार याचिकाकर्ता फैजाबाद से अकबरपुर के बीच चलने वाली बस में कंडक्टर था। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि बस में 59 यात्री बिना टिकट यात्रा कर रहे थे। इसके बाद उसे कारण बताओ नोटिस और आरोपपत्र दिया गया और अंततः सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। हालांकि, एक स्तर पर क्षेत्रीय प्रबंधक ने मामले को पुनर्विचार के लिए वापस भेजा था लेकिन दोबारा विभागीय जांच के बाद फिर से बर्खास्तगी का आदेश पारित किया गया। अपील भी खारिज होने के बाद कंडक्टर ने हाइकोर्ट का रुख किया। अदालत ने कहा कि बस को प्रारंभिक स्थान से लगभग 12 किलोमीटर दूर जांचा गया, जिससे स्पष्ट है कि कंडक्टर के पास यात्रियों को टिकट देने के लिए पर्याप्त समय था। फिर भी उसने ऐसा नहीं किया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि बिना टिकट यात्रियों को ले जाना या कम किराए पर टिकट देना बेईमानी या घोर लापरवाही की श्रेणी में आता है। इससे निगम को आर्थिक नुकसान होता है। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की, “बिना टिकट यात्रियों को ले जाना गंभीर कदाचार है और याचिकाकर्ता यह बताने में असफल रहा कि किन परिस्थितियों में उसने यात्रियों को टिकट जारी नहीं किया।” इन तथ्यों को देखते हुए हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी और बर्खास्तगी का आदेश बरकरार रखा।

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *