औरैया7 मिनट पहले
- कॉपी लिंक

औरैया पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने जीएसटी कर चोरी के एक गिरोह के चार शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह फर्जी फर्मों के माध्यम से लगभग 8.62 करोड़ रुपए के नकली बिल तैयार कर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ उठा रहा था। जिससे सरकार को भारी राजस्व का नुकसान हो रहा था।
पुलिस अधीक्षक औरैया के निर्देश पर की गई इस कार्रवाई में गिरफ्तार अभियुक्तों के पास से 3 लैपटॉप, 6 एंड्रॉयड मोबाइल, 3 कीपैड मोबाइल, 3 डोंगल, 1 हार्ड डिस्क, 2 पेन ड्राइव, 2 वाई-फाई राउटर, 16 डीएससी डिवाइस, विभिन्न सिम कार्ड, चार्जर, 6 फर्जी टैक्स इनवॉइस की प्रतियां और 60,330 रुपये नकद बरामद किए गए।

फर्जी बिलों का लेनदेन किया गया
इस मामले की शुरुआत 23 फरवरी 2026 को राज्य कर अधिकारी विजय शंकर दीक्षित की तहरीर से हुई थी। उन्होंने ‘मून इंटरप्राइजेज’ नामक फर्म पर फर्जी खरीद-बिक्री दिखाकर बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के माध्यम से कर चोरी का आरोप लगाया था। जांच में यह फर्म अपने पंजीकृत पते पर अस्तित्वहीन पाई गई।
जांच में सामने आया कि ‘मून इंटरप्राइजेज’ द्वारा 2.87 करोड़ रुपए और ‘चमन ट्रेडर्स’ द्वारा 5.75 करोड़ रुपए के फर्जी बिलों का लेनदेन किया गया था। कुल मिलाकर 8.62 करोड़ रुपये की कर योग्य राशि पर धोखाधड़ी की पुष्टि हुई। गिरफ्तार अभियुक्तों में मेरठ निवासी मो. अतहर (मुख्य संचालक), शाह आलम (अकाउंटेंट), विशाल (सहायक) और मो. इमरान (दस्तावेज प्रदाता) शामिल हैं।
जाली दस्तावेजों के आधार पर फर्जी फर्में पंजीकृत
पूछताछ के दौरान अभियुक्तों ने स्वीकार किया कि उन्होंने जाली दस्तावेजों के आधार पर फर्जी फर्में पंजीकृत कराई थीं। वे वास्तविक माल की खरीद-बिक्री के बिना केवल कागजों पर लेनदेन दिखाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ उठा रहे थे।
एसपी अभिषेक भारती ने बताया कि अतहर ‘मून इंटरप्राइजेज’ का संचालन करता था, जबकि इमरान ने फर्जी दस्तावेजों से ‘चमन ट्रेडर्स’ बनाई थी। शाह आलम और विशाल दोनों फर्मों के लिए फर्जी बिलिंग और हिसाब-किताब का काम संभालते थे। इस मामले में थाना कोतवाली औरैया में जीएसटी एक्ट की धारा 132 के साथ भारतीय दंड संहिता की अन्य संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
