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चर्चित अधिवक्ता अखिलेश दुबे को वक्फ की संपत्ति पर कब्जा कराने के आरोपी सस्पेंड इंस्पेक्टर सभाजीत मिश्रा को सात महीने बाद हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। सभाजीत को 12 सितंबर की देर रात पुलिस ने गिरफ्तार कर दूसरे दिन जेल भेजा था। यह था पूरा प्रकरण… परेड के नवाब इब्राहिम हाता निवासी मोईनुददीन आसिफ जाह ने ग्वालटोली थाने में बतौर मुतवल्ली मुकदमा दर्ज कराया था। बतौर आरोप सिविल लाइंस स्थित 13/387, 13/388 और 13/390 की संपत्ति नवाब मंसूर अली की थी। वर्ष 1911 में हाफिज हलीम को यह संपत्ति 99 वर्ष के पट्टे पर दी गई थी। संपत्ति 2010 तक प्रयोग की जा सकती थी। जिसके बाद यह पुन: वक्फ संपत्ति हो गई। आरोप है कि अखिलेश दुबे ने साथियों संग मिलकर वक्फ संपत्ति पर कब्जा कर लिया, इसमें तत्कालीन इंस्पेक्टर सभाजीत मिश्रा ने भी मदद की। आरोप है कि अप्रैल 2024 में सभाजीत कई लोगों के साथ उनके घर पहुंचे और डरा धमकाकर बिना दिखाए व पढ़ाए एक पेपर पर हस्ताक्षर करा लिए, आधार कार्ड भी ले लिया। धमकी दी कि लखनऊ में दर्ज एफआईआर की पैरवी बंद नहीं की तो तुम्हारा जेल जाना तय है। इसी मामले में पुलिस ने 12 सितंबर को सभाजीत मिश्रा को जेल भेजा था। वरिष्ठ अधिवक्ता पीयूष शुक्ला ने बताया कि हाईकोर्ट में जमानत के पक्ष में तर्क दिया गया कि कोई डायरेक्ट एवीडेंस नहीं है। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने जमानत अर्जी स्वीकार कर ली।
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7 माह से जेल में बंद इंस्पेक्टर सभाजीत को जमानत:वक्फ संपत्ति पर अखिलेश दुबे की मदद का था आरोप, हाईकोर्ट ने दी राहत