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पीलीभीत के जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में हुए 50 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले के मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। जनपद एवं सत्र न्यायालय ने मुख्य आरोपी इल्हाम उर रहमान शम्सी की सास नाहिद, सलहज आफिया खान और परिचित आशकारा परवीन को जमानत दे दी है। ये तीनों महिलाएं लगभग एक महीने से जिला कारागार में बंद थीं। बृहस्पतिवार को जनपद एवं सत्र न्यायाधीश रवींद्र कुमार की अदालत में मामले की सुनवाई हुई। आरोपियों के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि इन महिलाओं को दुर्भावनापूर्ण तरीके से मामले में फंसाया गया है। उन्हें अपने बैंक खातों में हुए संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की जानकारी नहीं थी। अधिवक्ता ने यह भी बताया कि वे मूल प्राथमिकी (FIR) में नामजद भी नहीं थीं, बल्कि जांच के दौरान सामने आए बयानों के आधार पर उनके नाम जोड़े गए। उन्होंने दलील दी कि मुख्य आरोपी इल्हाम को इलाहाबाद उच्च न्यायालय से पहले ही अंतरिम अग्रिम जमानत मिल चुकी है, इसलिए इन महिलाओं को भी इसी आधार पर जमानत का लाभ मिलना चाहिए। दूसरी ओर, राज्य सरकार के जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) ने जमानत अर्जी का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह सरकारी धन के गबन का एक अत्यंत गंभीर और सुनियोजित मामला है। अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि सरकारी राशि को कूट रचित तरीके से इन महिलाओं के खातों में भेजा गया था। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और प्रथम सूचना रिपोर्ट के तथ्यों का अवलोकन किया। न्यायालय ने पाया कि आवेदिका नाहिद, आफिया और आशकारा मुख्य प्राथमिकी में नामजद नहीं थीं। न्यायिक अनुशासन और समानता के सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए, न्यायालय ने तीनों महिलाओं की जमानत अर्जी मंजूर कर ली। अदालत ने आदेश दिया कि तीनों आवेदिकाओं को एक-एक लाख रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और समान धनराशि के दो-दो प्रतिभू दाखिल करने पर जमानत पर तुरंत रिहा किया जाए।
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50 करोड़ घोटाले में इल्हाम की सास, सलहज को जमानत:एक महीने से जेल में बंद तीनों महिलाएं हुईं रिहा, वकील बोले- गलत तरीके से फंसाया गया