4 Astronauts Travel 4.02 Lakh Km From Earth; Moon Dark Side Photo

वॉशिंगटन5 मिनट पहले

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नासा के ओरियन स्पेसक्राफ्ट में सवार चार अंतरिक्ष यात्री चांद की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। भारतीय समयानुसार 6 अप्रैल को उन्होंने चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में प्रवेश कर लिया है।

आज रात ये अंतरिक्ष यात्री चांद के उस हिस्से को अपनी आंखों से देखेंगे जिसे इंसानों ने सिर्फ तस्वीरों में देखा है। वे पृथ्वी से सबसे दूर जाने का 56 साल पुराना रिकॉर्ड भी तोडेंगे।

अपोलो 13 ने 1970 में धरती से सबसे ज्यादा दूरी 4,00,171 km का रिकॉर्ड बनाया था। इस मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों के पृथ्वी से 4,02,336 किमी दूर तक पहुंचने की उम्मीद है।

आर्टेमिस-II फ्लाईबाय का पूरा शेड्यूल

इवेंट समय (EST) (6 अप्रैल) समय (IST) (7 अप्रैल)
अपोलो-13 का रिकॉर्ड टूटेगा 1:56 PM 11:26 AM
एस्ट्रोनॉट्स का संदेश 2:10 PM 11:40 AM
चांद का ऑब्जर्वेशन शुरू 2:45 PM 12:15 AM
संपर्क टूटेगा 6:44 PM 04:14 AM
चांद के सबसे करीब 7:02 PM 04:32 AM
पृथ्वी से अधिकतम दूरी 7:07 PM 04:37 AM
पृथ्वी से दोबारा संपर्क 7:25 PM 04:55 AM
सूर्य ग्रहण 8:35 PM 06:05 AM
चांद का ऑब्जर्वेशन खत्म 9:20 PM 06:50 AM

चांद के अंधेरे हिस्से की फोटोग्राफी होगी

नासा ने क्रू को चांद की सतह के 30 खास टारगेट की लिस्ट भेजी है, जिनकी उन्हें फोटोग्राफी करनी है। इनमें सबसे प्रमुख ‘ओरिएंटल बेसिन’ है, जो करीब 600 मील चौड़ा क्रेटर है।

यह बेसिन 3.8 अरब साल पहले उल्कापिंड के टकराने से बना था। इसके अलावा वे ‘हर्ट्जस्प्रंग बेसिन’ का भी अध्ययन करेंगे ताकि समझ सकें कि समय के साथ चांद की सतह कैसे बदली।

यह उस एप्लिकेशन का स्क्रीनशॉट है जिसे आर्टेमिस II का क्रू अपने PCDs पर देखता है। यह सॉफ्टवेयर उन्हें चांद से जुड़े वैज्ञानिक ऑब्जर्वेशन प्लान को पूरा करने में गाइड करता है।

यह उस एप्लिकेशन का स्क्रीनशॉट है जिसे आर्टेमिस II का क्रू अपने PCDs पर देखता है। यह सॉफ्टवेयर उन्हें चांद से जुड़े वैज्ञानिक ऑब्जर्वेशन प्लान को पूरा करने में गाइड करता है।

सातवां दिन: चांद की ग्रेविटी से पृथ्वी पर लौटेगा यान

चांद के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बाहर निकलकर यान वापस धरती की ओर अपना सफर शुरू कर देगा। आर्टेमिस-II का रास्ता काफी हद तक 1970 के अपोलो-13 मिशन जैसा है।

यह चांद के गुरुत्वाकर्षण का इस्तेमाल ‘गुलेल’ की तरह करेगा, जो यान को वापस पृथ्वी की ओर धकेल देगा। पूरे मिशन में चारों अंतरिक्ष यात्री करीब 11.02 लाख किमी का सफर तय करेंगे।

दसवां दिन: 10 अप्रैल को प्रशांत महासागर में गिरेगा यान

भारतीय समय के अनुसार 11 अप्रैल को सुबह 6:30 बजे ओरियन पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा। 6:36 बजे यह सैन डिएगो के पास प्रशांत महासागर में ‘स्प्लैशडाउन’ करेगा। इसके बाद ह्यूस्टन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी, जिसमें मिशन की जानकारी दी जाएगी।

मकसद: ‘लाइफ सपोर्ट सिस्टम’ की जांच चाहता है नासा

मिशन का मकसद स्पेसक्राफ्ट के ‘लाइफ सपोर्ट सिस्टम’ की जांच करना है। नासा देखना चाहता है कि अंतरिक्ष में इंसानों के रहने के लिए यह कितना सुरक्षित है। यान अभी चंद्रमा की सतह पर नहीं उतरेगा, लेकिन भविष्य में चंद्रमा पर इंसानों के बसने का रास्ता आसान बनाएगा।

4 एस्ट्रोनॉट्स: पहली बार कोई महिला चांद के करीब पहुचेगी

मिशन में नासा के तीन और कनाडाई स्पेस एजेंसी (CSA) का एक अंतरिक्ष यात्री शामिल है।

1. रीड वाइजमैन: यूएस नेवी के टेस्ट पायलट रह चुके वाइजमैन (50) मिशन कमांडर हैं। 2014 में स्पेस स्टेशन पर 6 महीने बिताने वाले वाइजमैन जमीन पर ऊंचाई से डरते हैं। 2020 में अपनी पत्नी को खोने के बाद वाइजमैन अपनी दो बेटियों की अकेले परवरिश कर रहे हैं।

2. क्रिस्टीना कोच: इंजीनियर और फिजिसिस्ट क्रिस्टीना कोच (47) मिशन स्पेशलिस्ट हैं। वह अंतरिक्ष में सबसे लंबे समय तक रहने वाली महिला (328 दिन) का रिकॉर्ड बना चुकी हैं। बचपन में अपोलो-8 की खींची गई ‘अर्थराइज’ फोटो देखकर उन्होंने अंतरिक्ष यात्री बनने की ठानी थी।

3. जेरेमी हैनसन: कनाडा के पूर्व फाइटर पायलट जेरेमी हैनसन (50) मिशन स्पेशलिस्ट हैं। अगर सब-कुछ प्लान के मुताबिक रहा तो हैनसन इस मिशन के जरिए चांद तक पहुंचने वाले पहले गैर-अमेरिकी बनेंगे। हैनसन अपने साथ कनाडा का मशहूर मैपल सिरप और कुकीज ले गए हैं।

4. विक्टर ग्लोवर: मिशन के लिए पायलट चुने गए ग्लोवर (49) चांद के करीब पहुंचने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति होंगे। ग्लोवर अपने साथ बाइबिल, अपनी शादी की अंगूठियां ले गए हैं। वे कहते हैं कि ब्रह्मांड में अपनी जगह को तलाशना और सीखना ही इंसान होने का असली मतलब है।

नासा के एस्ट्रोनॉट और कमांडर रीड वाइसमैन, मिशन स्पेशलिस्ट क्रिस्टीना कोच, पायलट विक्टर ग्लोवर और कनाडाई स्पेस एजेंसी (CSA) के मिशन स्पेशलिस्ट जेरेमी हैनसन (दाएं से बाएं)।

नासा के एस्ट्रोनॉट और कमांडर रीड वाइसमैन, मिशन स्पेशलिस्ट क्रिस्टीना कोच, पायलट विक्टर ग्लोवर और कनाडाई स्पेस एजेंसी (CSA) के मिशन स्पेशलिस्ट जेरेमी हैनसन (दाएं से बाएं)।

अपोलो और आर्टेमिस प्रोग्राम में बड़ा अंतर

70 के दशक में हुए अपोलो मिशन का मुख्य उद्देश्य सोवियत संघ के साथ चल रही ‘स्पेस रेस’ में खुद को बेहतर साबित करना था। आर्टेमिस प्रोग्राम पूरी तरह से भविष्य की तैयारी है।

नासा इस बार चांद पर एक स्थायी बेस बनाना चाहता है, ताकि इंसान वहां रहकर काम करना सीख सके। यह अनुभव भविष्य में मंगल पर जाने के सपने को पूरा करने में मदद करेगा।

साल 1969 में चंद्रमा की सतह पर अमेरिकी झंडे के पास खड़े अंतरिक्ष यात्री बज एल्ड्रिन।

साल 1969 में चंद्रमा की सतह पर अमेरिकी झंडे के पास खड़े अंतरिक्ष यात्री बज एल्ड्रिन।

नासा का आर्टेमिस-II मिशन 2 अप्रैल को लॉन्च हुआ था

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने भारतीय समय के अनुसार 2 अप्रैल को ‘आर्टेमिस-2’ मिशन लॉन्च किया था। सुबह 4:05 बजे ‘स्पेस लॉन्च सिस्टम’ (SLS) ओरियन स्पेसक्राफ्ट में 4 अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर चांद की ओर रवाना हुआ।

साल 1972 में ‘अपोलो-17’ के बाद यह पहला मौका है जब कोई इंसान पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) को पार कर चांद के करीब पहुंचेगा। चारों यात्री स्पेसक्राफ्ट से चांद के चारों ओर चक्कर लगाएंगे और फिर धरती पर लौटेंगे। यह मिशन 10 दिन का है।

नासा का स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट ओरियन स्पेसक्राफ्ट को लेकर गुरुवार, 2 अप्रैल 2026 को फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर के लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39B से रवाना हुआ।

नासा का स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट ओरियन स्पेसक्राफ्ट को लेकर गुरुवार, 2 अप्रैल 2026 को फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर के लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39B से रवाना हुआ।

नॉलेज पार्ट:

  • अब तक केवल 24 लोग ही चांद के पास या उसकी सतह तक पहुंच पाए हैं। वे सभी अमेरिकी एस्ट्रोनॉट्स थे। सभी 1968 से 1972 के बीच चले अपोलो मिशन का हिस्सा थे।
  • नासा के ‘अपोलो प्रोग्राम’ में क्रू और बिना क्रू वाले मिलाकर कुल 17 मिशन हुए। अगर सिर्फ उन मुख्य मिशनों की बात करें जिनमें अंतरिक्ष यात्री शामिल थे, तो ये 11 थे।

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