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मथुरा में टीईटी अनिवार्यता के विरोध में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के बैनर तले बुधवार को शिक्षकों ने जिला मुख्यालय पर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने सरकार से टीईटी लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को इस व्यवस्था से बाहर रखने की मांग करते हुए जिलाधिकारी के प्रतिनिधि उपजिलाधिकारी सुशील कुमार को ज्ञापन सौंपा। प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. कमल कौशिक के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में शिक्षकों ने कहा कि एनसीटीई की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना और उत्तर प्रदेश में 27 जुलाई 2011 से लागू टीईटी व्यवस्था से पहले नियुक्त शिक्षकों पर यह शर्त लागू करना न्यायोचित नहीं है। उन्होंने कहा कि नियुक्ति के वर्षों बाद सेवा नियमों में बदलाव करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। शिक्षकों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग डॉ. कौशिक ने कहा कि देशभर में 20 लाख से अधिक शिक्षक टीईटी व्यवस्था लागू होने से पहले नियुक्त हुए थे। ऐसे शिक्षकों पर बाद में टीईटी की बाध्यता थोपना उनके सम्मान और सेवा सुरक्षा पर सीधा आघात है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन का अगला चरण दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। जिला मीडिया प्रमुख गोवर्धन दास गुप्ता ने कहा कि वर्षों से शिक्षा व्यवस्था को मजबूती देने वाले शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए केंद्र और राज्य सरकार को संवेदनशील रुख अपनाना चाहिए। उन्होंने शिक्षा का अधिकार अधिनियम में संशोधन कर शिक्षकों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। जिला अध्यक्ष अंजना शर्मा ने संसद के माध्यम से इस व्यवस्था को समाप्त करने की मांग उठाई।
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20 लाख शिक्षकों की नौकरी पर संकट का दावा:मथुरा में टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ सड़कों पर उतरे शिक्षक, सौंपा ज्ञापन