हिमाचल में मानसून में भी पूरी तरह नहीं भरे डैम:भाखड़ा 65, पोंग 40.7 फुट खाली; बिजली उत्पादन और पंजाब-हरियाणा की सिंचाई पर पड़ेगी मार


हिमाचल प्रदेश की प्रमुख नदियों पर बने ज्यादातर बांध मानसून की बारिश से भी पूरी तरह नहीं भर पाए। भाखड़ा बांध अभी कुल क्षमता का 19.9 मीटर (65 फुट) खाली पड़ा है। इसी तरह पोंग बांध भी 12.41 मीटर और नाथपा झाकड़ी परियोजना का जलाशय भी क्षमता से 22.05 मीटर कम भरा पाया है। राज्य में आगामी दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो इसका असर पंजाब, हरियाणा और राजस्थान की खेतीबाड़ी के साथ-साथ बिजली उत्पादन पर पड़ सकता है। इससे न केवल हिमाचल बल्कि उत्तर भारत में विद्युत उत्पादन में कमी आ सकती है। ‘दैनिक भास्कर एप’ की इस रिपोर्ट में भाखड़ा समेत तीन प्रमुख बांधों की स्थिति जाने। भाखड़ा बांध का जलाशय अभी 19.9 मीटर खाली स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट ऑथोरिटी के अनुसार- भाखड़ा बांध का वाटर लेवल 11 अगस्त 2026 को 492.17 मीटर दर्ज किया गया, साल 2025 में यह 502.00 मीटर था। यानी 2025 की तुलना में इस बार भाखड़ा बांध का जलाशय 9.83 मीटर कम भर पाया है, जबकि कुल क्षमता का 19.9 मीटर खाली है। इस प्रोजेक्ट की जल व्यवस्था से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली सीधे तौर पर जुड़े हैं। इसका जलाशय सतलुज नदी पर बना है। BBMB की व्यवस्था के तहत इसके पानी का इस्तेमाल सिंचाई एवं अन्य जल जरूरतों के लिए किया जाता है। पोंग बांध का जलाशय 12.41 मीटर खाली इसी तरह, ब्यास नदी पर बने पोंग बांध में भी पिछले साल के मुकाबले कम पानी है। 11 अगस्त 2026 को पोंग का वाटर लेवल 411.26 मीटर रहा, जबकि 11 अगस्त 2025 को यह 419.365 मीटर था। यानी पिछले साल के मुकाबले 8.105 मीटर कम है। इसकी कुल क्षमता 423.67 मीटर है। इस लिहाज से पोंग का जलाशय अभी 12.41 मीटर खाली है। पोंग डैम की सिंचाई व्यवस्था का संबंध मुख्य रूप से राजस्थान, पंजाब और हरियाणा से है। BBMB के अनुसार ब्यास परियोजना का पोंग जलाशय बड़ी मात्रा में पानी का भंडारण करता है और सिंचाई तथा बिजली उत्पादन दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। नाथपा झाकड़ी में सबसे बड़ी गिरावट सतलुज नदी पर बनी नाथपा झाकड़ी जलविद्युत परियोजना के वाटर लेवल में पिछले साल के मुकाबले सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। 11 अगस्त 2026 को इसका वाटर लेवल 1473.65 मीटर रहा, जबकि पिछले साल इसी तारीख को यह 1492.08 मीटर था। यानी इस बार वाटर लेवल 18.43 मीटर कम है। नाथपा झाकड़ी में बनने वाली बिजली उत्तरी क्षेत्र के ग्रिड में जाती है और इसके लाभार्थियों में हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली और चंडीगढ़ शामिल हैं। पानी कम हुआ तो क्या असर होगा? बांध पूरी तरह भरते तो ये फायदा होता हिमाचल के बांध पूरी तरह भरने पर सितंबर से दिसंबर तक बिजली उत्पादन अच्छा रहता है, जिससे राज्य बिजली बोर्ड को बेहतर आय होती है। इसी तरह, इन बांधों से अगले दो-तीन महीनों तक पानी का आउटफ्लो भी अच्छा रहने की उम्मीद होती है। इससे पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सकेगा। हालांकि, इस मानसून सीजन में सामान्य से कम बारिश के कारण बांधों में पानी की आवक कम रही है।

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *