हाईकोर्ट बोला-भ्रष्ट अधिकारी बिना कार्रवाई के पदों पर हैं:एटा के मामले में हाईकोर्ट ने कहा यह प्रशासन की घोर निष्क्रियता


इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एटा जिले में भ्रष्टाचार के एक मामले में कहा है कि जांच में दोषी पाए जाने के बावजूद भ्रष्टाचारियों का अपने पदों पर बने रहना अधिकारियों की घोर निष्क्रियता तथा व्यवस्था की गंभीर शिथिलता को उजागर करता है। मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह कड़ी टिप्पणी करते हुए इस बात पर गहरा आश्चर्य व्यक्त किया कि 27 नवंबर 2024 की जांच रिपोर्ट, जिसमें क्षेत्र पंचायत के प्रशासक को दोषी ठहराया गया था, वह रिपोर्ट याचिका दाखिल होने के लगभग दो साल बाद जिला मजिस्ट्रेट के संज्ञान में आई। क्या है मामला जानिये मामले के क्रम के अनुसार, राम कुमार द्वारा इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल कर एटा जिले के क्षेत्र पंचायत प्रशासक के खिलाफ भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए गए थे। याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत निर्देशों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने पाया कि जांच रिपोर्ट आने के बावजूद लंबे समय तक जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया था। पीठ ने उठाए सवाल सुनवाई के दौरान जब पीठ ने इस पर सवाल उठाए, तो सरकार के स्थायी अधिवक्ता ने कोर्ट को अवगत कराया कि अब आरोपी प्रशासक को पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हालांकि, प्रशासक द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर और नियुक्ति आदेश के प्रतिबंधों का उल्लंघन कर बड़े नीतिगत फैसले लेने के आरोपों पर अभी अधिकारियों की ओर से स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई अदालत ने इस पूरे मामले में सख्त रुख अपनाते हुए निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई से पूर्व प्रतिवादी संख्या 4 (प्रशासक) को पद से हटाने की कार्रवाई पूरी की जाए तथा उनके कार्यकाल के दौरान की गई सभी गतिविधियों का पूरा विवरण अदालत के सामने प्रस्तुत किया जाए। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने अधिकारियों से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि 2024 की जांच आख्या के क्रम में वित्तीय गबन या नुकसान की वसूली के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। पीठ ने इस जनहित याचिका पर अगली सुनवाई के लिए 4 नवंबर 2026 की तिथि नियत की है।

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