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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने रायबरेली के मीरजहांपुर गांव में भूमि अधिग्रहण के एक मामले में राजस्व रिकॉर्ड पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने पूछा है कि जब जमीन का बंटवारा नहीं हुआ है, तो राजस्व अधिकारियों ने अधिग्रहण की गई जमीन को छह अलग-अलग खातों से कैसे जोड़ दिया। खास बात यह है कि इन छह खातों में याचिकाकर्ताओं के नाम भी दर्ज नहीं हैं। जस्टिस राजन राय और जस्टिस मंजिव शुक्ला की बेंच ने रायबरेली के जिलाधिकारी (DM) और अपर जिलाधिकारी (ADM) को 18 सितंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है। अधिकारियों को यह भी बताना होगा कि याचिकाकर्ताओं के हिस्से की जमीन वास्तव में खाली है और उस पर उनका कब्जा है या नहीं। याचिकाकर्ताओं के नाम उन खातों में नहीं हैं यह मामला सलोन तहसील के मीरजहांपुर गांव में गाटा संख्या 584(6) से जुड़ा है। राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि गाटा की कुछ जमीन का अधिग्रहण हो चुका है। अधिकारियों के मुताबिक, यह जमीन छह खातों में दर्ज है, जबकि याचिकाकर्ताओं के नाम उन खातों में नहीं हैं। कोर्ट ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब मिनजुमला गाटा का भौतिक बंटवारा नहीं हुआ है, तो उसके किसी खास हिस्से को छह खातों में अलग-अलग कैसे तय किया जा सकता है। कोर्ट ने DM से शपथपत्र देकर यह साफ करने को कहा है कि अधिग्रहण की गई जमीन से जुड़े छह खाताधारकों को मुआवजा मिला है या नहीं। साथ ही, बाकी दो खातों में याचिकाकर्ताओं या उनमें से किसी का नाम दर्ज है या नहीं, यह भी साफ करना होगा। मौके की स्थिति साफ करने के लिए, अगर संभव हो तो, तस्वीरें और वीडियो भी कोर्ट में पेश करने को कहा गया है।
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हाईकोर्ट ने रायबरेली DM-ADM को भूमि अधिग्रहण में तलब किया:मिनजुमला गाटा में हिस्सेदारी पर सवाल, मौके की तस्वीरें और वीडियो भी मांगे