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गोरखपुर विकास प्राधिकरण (GDA) में मानचित्र से थोड़ा अंतर होने पर अब भवनों को सीलिंग या ध्वस्तीकरण में ले जाने से पहले शमन का मौका दिया जाएगा। यानी अतिरिक्त निर्माण का नियमानुसार शमन मानचित्र पास किया जाएगा। इसपर पूरे प्राधिकरण का जोर होगा। GDA के हर जोन के जेई एवं एई के पास हर सप्ताह 15-15 भवनों के शमन मानचित्र का जिम्मा होगा। यानी हर सप्ताह 60 भवनों का शमन किया जा सकेगा।
प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल ने इसको लेकर निर्देश दिए हैं। वाद अनुभाग की समीक्षा बैठक में प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ने शमन मानचित्रों के त्वरित निस्तारण से प्राधिकरण की आय में बढ़ोत्तरी होगी। इससे आम लोगों को किसी तरह की कार्रवाई की आशंका से मुक्ति भी मिलेगी। नियमों की अनदेखी पर होगी सख्ती शमन मानचित्रों पर जोर का मतलब यह नहीं कि अवैध निर्माण को लेकर कोई छूट मिलेगी। प्राधिकरण ने यह स्पष्ट किया है कि नियमों की अनदेखी करने वालों के साथ सख्ती बरती जाएगी। जो शमन मानचित्र दाखिल नहीं करेंगे, उनके विरुद्ध सीलिंग व ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होगी। अधिकारियों को प्रवर्तन अभियान और अधिक प्रभावी बनाने तथा अवैध निर्माणों के विरुद्ध नियमित कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में यह भी तय किया गया कि मानचित्र, अभियंत्रण और प्रवर्तन अनुभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। शासन से नामित विशेषज्ञों और नगर नियोजकों की मदद से सहायक अभियंताओं, अवर अभियंताओं, लिपिकों और तकनीकी कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें निर्माण संबंधी नियमों, एमबी बुक के रखरखाव, सड़क निर्माण की ईपीसी प्रक्रिया और अन्य तकनीकी विषयों की जानकारी दी जाएगी।
प्रशिक्षण के बाद अधिकारियों और कर्मचारियों की दक्षता का मूल्यांकन परीक्षा के माध्यम से किया जाएगा। यूपीओबीपीएएस पोर्टल पर पंजीकृत आर्किटेक्ट्स की तकनीकी योग्यता की जांच के लिए भी परीक्षा आयोजित करने की योजना है। इसके अलावा वाद अनुभाग के लंबित मामलों के तेजी से निस्तारण के लिए अतिरिक्त कंप्यूटर आपरेटरों की सहायता लेने के निर्देश दिए गए हैं।
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हर सप्ताह 60 भवनों का होगा शमन:GDA में हर जोन के जेई, एई को लक्ष्य मिला