'स्मृतियां कभी नहीं मरती' पर प्रयागराज में साहित्यिक विमर्श:कवि अमरजीत राम बोले- यादें संघर्ष की ताकत, वरिष्ठ साहित्यकारों ने की काव्य संग्रह की सराहना


प्रयागराज में रविवार देर शाम प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस) की ओर से युवा कवि अमरजीत राम के पहले काव्य संग्रह ‘स्मृतियां कभी नहीं मरती’ पर साहित्यिक विमर्श आयोजित किया गया। कार्यक्रम में शहर के साहित्यकारों, कवियों और साहित्य प्रेमियों ने भाग लिया। इस दौरान कवि ने अपनी चर्चित कविताओं का पाठ किया, जबकि वक्ताओं ने संग्रह को सामाजिक सरोकारों और प्रतिरोध की मजबूत अभिव्यक्ति बताया। कार्यक्रम में साहित्यकारों ने कहा कि स्मृतियां केवल अतीत की याद नहीं होतीं, बल्कि वर्तमान के संघर्षों को दिशा और ताकत देने का माध्यम भी हैं। वक्ताओं ने अमरजीत राम की कविताओं में सामाजिक संवेदना, प्रतिरोध और लोकजीवन की सशक्त अभिव्यक्ति को उनकी सबसे बड़ी विशेषता बताया। कार्यक्रम की शुरुआत युवा कवि अमरजीत राम के काव्य पाठ से हुई। उन्होंने ‘निर्भया’, ‘दीमक’, ‘हमारे समय की स्त्रियां’ और ‘डोम की अंतरकथा’ जैसी कविताएं सुनाईं। उनकी रचनाओं में समाज के हाशिए पर खड़े लोगों के दर्द, संघर्ष और जीवन के यथार्थ को प्रमुखता से रखा गया। वरिष्ठ कवि हरीशचंद्र पांडेय ने कहा कि अमरजीत राम की कविताएं पूर्वजों की स्मृतियों को जीवंत करती हैं। उन्होंने विशेष रूप से ‘हरीशचंद्र घाट’ कविता का उल्लेख करते हुए कहा कि कवि का सामाजिक आक्रोश और संवेदनशील दृष्टि उन्हें एक परिपक्व रचनाकार बनाती है। सुधांशु कुमार मालवीय ने काव्य संग्रह को ‘प्रतिरोध का सौंदर्यशास्त्र’ बताया। उन्होंने कहा कि संग्रह की कविताएं जातिवाद और सामाजिक असमानता पर प्रभावी चोट करती हैं। वरिष्ठ कवि अजामिल ने कहा कि अमरजीत राम की कविताएं देखने में सहज लगती हैं, लेकिन उनकी सादगी ही उन्हें खास बनाती है। उन्होंने संग्रह की भाषा, लोक शब्दों और अभिव्यक्ति की भी सराहना की। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं अनिता गोपेश ने कहा कि यह संग्रह पाठकों को जगाने का काम करता है। उन्होंने कहा कि जिस पीढ़ी के पास अपनी स्मृतियां नहीं होतीं, वह सांस्कृतिक रूप से कमजोर हो जाती है। प्रलेस के कार्यकारी अध्यक्ष सुरेंद्र राही ने कहा कि आज के समय में कविता का राजनीतिक और सामाजिक सरोकारों से जुड़ा होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अमरजीत राम की कविताएं पाठक को सोचने के लिए मजबूर करती हैं। वहीं कथाकार प्रियदर्शन मालवीय ने संग्रह की बिंब योजना और रचनात्मकता की सराहना की। कार्यक्रम का संचालन सुमन ने किया। स्वागत महासचिव संध्या नवोदिता ने किया, जबकि अंत में प्रकर्ष मालवीय ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

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