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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेरठ के लिसाड़ी गेट थाने में हुई एक महिला की गिरफ्तारी को अवैध करार देते हुए उसे तुरंत रिहा करने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने यह आदेश दिया। अपनी भाभी की हत्या के आरोप में 12 जुलाई 2026 को शाम 4 बजे उसके घर से गिरफ्तार किया गया और 14 जुलाई को दोपहर करीब 1 बजे रिमांड मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। बचाव पक्ष ने सीजेएम मेरठ के सामने थाने की सीसीटीवी फुटेज मांगने की अर्जी दी थी, जिसे मजिस्ट्रेट ने मंजूर भी किया, लेकिन पुलिस ने फुटेज पेश ही नहीं की। कोर्ट ने पाया कि पुलिस ने अदालत से तथ्य छिपाए गए ।यह बहाना बनाया गया कि कैमरे खराब हैं और रिकॉर्डिंग नहीं हो रही, जबकि जनरल डायरी में मरम्मत के लिए भेजे गए रिमाइंडरों का जिक्र मिला। कोर्ट ने डी.के. बासु और परमवीर सिंह सैनी बनाम बलजीत सिंह मामलों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय गिरफ्तारी संबंधी दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि पुलिस ने इनका पालन नहीं किया। गिरफ्तारी मेमो में भी खामियां पाई गईं समय में काट-छांट, गवाहों के हस्ताक्षर न होना और कई कॉलम खाली होना शामिल है। इन तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने गिरफ्तारी, हिरासत और रिमांड को अवैध बताते हुए सीजेएम मेरठ को आदेश दिया कि 24 घंटे के भीतर महिला को रिहा किया जाय।
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सीसीटीवी फुटेज न देने पर मेरठ पुलिस को फटकार:महिला की गिरफ्तारी अवैध करार, रिहाई का निर्देश