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सीतापुर के बिसवां कोतवाली इलाके में स्थित निजी सीता हॉस्पिटल में उपचार के दौरान शुक्रवार को हुई युवक की मौत के मामले में गठित तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच में मरीज की गंभीर स्थिति के बावजूद समय रहते उच्च चिकित्सालय रेफर न किए जाने को चिकित्सकीय लापरवाही माना गया है। जांच समिति ने संबंधित चिकित्सक को दोषी ठहराया है, जिसके बाद जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर. ने अस्पताल संचालक एवं चिकित्सक डॉ. राजेश प्रसाद वर्मा के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर नियमानुसार विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। गौरतलब है कि 24 जुलाई को कोतवाली क्षेत्र के ग्राम कोटरा निवासी 35 वर्षीय छोटेलाल भार्गव को पीलिया की शिकायत पर कस्बे के मोहल्ला शंकरगंज स्थित सीता हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई थी। घटना के बाद मृतक के परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा करते हुए डॉक्टर पर इलाज में लापरवाही और समय रहते बेहतर उपचार के लिए रेफर न करने का आरोप लगाया था। सूचना पर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक राम माधव सिंह और कस्बा इंचार्ज सुधाकर सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजते हुए मामले की जांच शुरू की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने एसडीएम बिसवा सर्वेश कुमार सिंह की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की थी, जिसमें उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज कुमार देशानी तथा सीएचसी बिसवां के अधीक्षक को शामिल किया गया था। समिति को 24 घंटे के भीतर जांच रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए थे। जांच समिति ने उपलब्ध अभिलेखों, उपचार संबंधी दस्तावेजों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद निष्कर्ष निकाला कि मरीज की हालत गंभीर होने पर उसे समय रहते उच्च केंद्र रेफर किया जाना चाहिए था। ऐसा न करना चिकित्सकीय लापरवाही है। इसी रिपोर्ट के आधार पर अब जिला प्रशासन ने संबंधित चिकित्सक के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए हैं।
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सीतापुर में मरीज की मौत पर डॉक्टर दोषी, FIR:DM के निर्देश पर जांच टीम ने मानी लापरवाही,24 जुलाई को हुई थी मौत