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सीतापुर में घाघरा नदी का घटता जलस्तर और तेज कटान रामपुर मथुरा क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए लगातार मुसीबत बनता जा रहा है। ग्राम पंचायत नागेश्वरपुरवा के शुक्लपुरवा गांव में नदी का कटान तेजी से बढ़ रहा है। हालात ऐसे हो गए हैं कि ग्रामीण अपने हाथों से अपना आशियाना उजाड़कर घर-गृहस्थी का सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने को मजबूर हैं। गुरुवार शाम तक करीब आठ बीघा कृषि योग्य भूमि नदी के कटान में समा चुकी थी। वहीं बैराजों से करीब 2.45 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है। कभी जिन घरों में बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब परिवार अपने घर को बचाने के बजाय सामान बचाने की जद्दोजहद में जुटे हैं। ग्रामीण नाव के सहारे चारपाई, अनाज, बर्तन, कपड़े और अन्य जरूरी सामान बांध के उस पार सुरक्षित स्थानों तक पहुंचा रहे हैं। कोई सिर पर गृहस्थी का सामान उठाए नजर आ रहा है तो कोई बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने में जुटा है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी का कटान लगातार तेज हो रहा है। ऐसे में समय रहते जरूरी सामान निकाल लेना ही मजबूरी है। हर साल बाढ़ और कटान के कारण उन्हें इसी तरह विस्थापन का दर्द झेलना पड़ता है। सबसे ज्यादा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता है। स्कूल जाने की उम्र में बच्चे बाढ़ और अस्थायी ठिकानों के बीच जीवन बिताने को मजबूर हैं। प्रशासन की ओर से राहत और बचाव के प्रयास किए जा रहे हैं। ग्राम प्रधान और राजस्व विभाग की टीम मौके पर निगरानी बनाए हुए है। ग्रामीणों से खतरे को देखते हुए समय रहते सुरक्षित स्थान पर जाने और जरूरी सामान निकालने की अपील की जा रही है। ग्सरकारी गाइडलाइन के तहत बाढ़ में पूरी तरह नष्ट हुई कच्ची झोपड़ी के लिए 8 हजार रुपये, जबकि कटान से क्षतिग्रस्त या नष्ट हुए पक्के मकान के लिए 1.20 लाख रुपये की सहायता राशि का प्रावधान है।हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि मुआवजा मिलने से घर दोबारा बनाया जा सकता है, लेकिन वर्षों की मेहनत और उससे जुड़ी यादें वापस नहीं लाई जा सकतीं।
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सीतापुर में घाघरा के कटान ने छीना आशियाना:24 घंटे में 8 बीघा कृषि भूमि नदी में समाई, लोग सामान लेकर पलायन कर रहे