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सिद्धार्थनगर में नवजात शिशु की कथित चिकित्सीय लापरवाही से मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले की पड़ताल में जिला मुख्यालय स्थित मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय से महज दो किलोमीटर के दायरे में पांच ऐसे अस्पताल और क्लीनिक संचालित मिले, जिनका स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में कोई वैध पंजीकरण नहीं है। इन अस्पतालों और क्लीनिकों में मरीज भर्ती थे, बेड लगे थे, मेडिकल स्टोर संचालित हो रहे थे और खुलेआम इलाज के साथ ऑपरेशन की तैयारी तक की जा रही थी। दैनिक भास्कर की जमीनी पड़ताल में जिले की स्वास्थ्य निगरानी व्यवस्था की बड़ी लापरवाही सामने आई है। 40-50 बेड वाला अस्पताल बिना रजिस्ट्रेशन चलता मिला सबसे पहले सनई-शोहरतगढ़ मार्ग स्थित “आरोग्य मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल” की पड़ताल की गई। दो मंजिला इस अस्पताल में करीब 40 से 50 बेड लगे मिले, जबकि लगभग 20 मरीज भर्ती थे। कई मरीजों को ड्रिप लगी थी और कुछ ऑपरेशन का इंतजार कर रहे थे। भास्कर टीम ने खुद को मरीज बताकर पथरी के ऑपरेशन की जानकारी ली। अस्पताल में मौजूद डॉक्टर ने बिना किसी विस्तृत जांच रिपोर्ट के करीब 25 हजार रुपए में ऑपरेशन करने की बात कही। अस्पताल की एक महिला कर्मचारी ने दावा किया कि मेडिकल कॉलेज के “डीसी चौधरी” नाम के डॉक्टर यहां ऑपरेशन करते हैं। हालांकि अस्पताल प्रबंधन कोई वैध पंजीकरण दस्तावेज नहीं दिखा सका। महिला संचालक ने भी कोई जवाब देने से इनकार कर दिया। विनायक हॉस्पिटल में भी भर्ती मिले मरीज इसके बाद भास्कर टीम उस्का रोड स्थित “विनायक हॉस्पिटल” पहुंची। यहां भी अस्पताल पूरी तरह संचालित मिला। मरीज भर्ती थे और इलाज जारी था, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में अस्पताल का कोई पंजीकरण नहीं मिला। जब अस्पताल संचालक से दस्तावेज मांगे गए तो उन्होंने भी कोई जवाब नहीं दिया। जनता क्लीनिक में मेडिकल स्टोर और बेड मिले तीसरा खुलासा “जनता क्लीनिक” में हुआ। यहां मेडिकल स्टोर, बेड और इलाज की पूरी व्यवस्था मिली। कर्मचारी ने बताया कि यहां चार डॉक्टर बैठते हैं और पथरी का ऑपरेशन दूसरे अस्पताल में कराया जाता है। हालांकि रिकॉर्ड जांच में क्लीनिक का नाम कहीं दर्ज नहीं मिला। क्लीनिक प्रबंधन ने दावा किया कि उन्होंने रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया है। एपेक्स एसबीपी और आलम डेंटल केयर भी बिना मान्यता संचालित भास्कर टीम “एपेक्स एसबीपी मल्टीस्पेशलिटी” पहुंची तो वहां भी अस्पताल जैसी पूरी व्यवस्था मिली। मरीज भर्ती थे, लेकिन अस्पताल का कोई वैध पंजीकरण नहीं मिला। स्टेशन रोड स्थित “आलम डेंटल केयर” में दांतों के इलाज के लिए एक्सरे मशीन और अन्य उपकरण लगे मिले। डॉक्टर मरीजों को दवाइयां भी लिख रहे थे, लेकिन यहां भी कोई वैध दस्तावेज नहीं दिखाया गया। नवजात की मौत के बाद उठे गंभीर सवाल 23 मई को नवजात की मौत के बाद हुई इस पड़ताल ने जिला मुख्यालय के आसपास संचालित कथित अवैध अस्पतालों और क्लीनिकों का बड़ा नेटवर्क उजागर कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले में बड़ी संख्या में ऐसे अस्पताल और नर्सिंग होम चल रहे हैं, जहां बिना मानक और बिना विशेषज्ञ डॉक्टरों के इलाज किया जा रहा है। कम खर्च और तुरंत इलाज का लालच देकर मरीजों को भर्ती कर लिया जाता है। हालत बिगड़ने पर उन्हें मेडिकल कॉलेज या बड़े शहरों के अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है। CMO बोले- रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हैं अस्पताल मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रजत कुमार चौरसिया ने कहा कि जिन अस्पतालों और क्लीनिकों की जानकारी सामने आई है, उनका स्वास्थ्य विभाग में कोई रिकॉर्ड नहीं है। उन्होंने कहा कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और जांच के बाद बिना मानक और बिना वैध पंजीकरण संचालित अस्पतालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। जनता सेवा हॉस्पिटल मामले में पुलिस पहले ही मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर चुकी है। वहीं CMO ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति में अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (RCH) डॉ. आरजी सिंह, उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आशीष कुमार अग्रहरी और सीएचसी इटवा अधीक्षक डॉ. संदीप कुमार द्विवेदी को शामिल किया गया है। समिति को एक सप्ताह में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
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सिद्धार्थनगर में CMO ऑफिस से 2KM दायरे में 5 अवैध-अस्पताल:बिना रजिस्ट्रेशन हो रहा संचालन, ऑपरेशन तक की तैयारी; CMO बोले- जांच कर होगी कार्रवाई