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बिहार के पूर्व मंत्री और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के संस्थापक मुकेश सहनी को तीन दिन तक लखनऊ स्थित उनके घर में रोके जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। न्यायालय ने पूछा है कि सहनी को 28 से 30 जून तक उनके घर से बाहर नहीं निकलने का आदेश क्यों दिया गया था और क्या उन्हें इसकी वजह बताई गई थी। यह आदेश न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा की बेंच ने मुकेश सहनी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। सुनवाई के दौरान सहनी के वकील ने न्यायालय को बताया कि शाहजहांपुर के पुलिस अधीक्षक ने 28 जून 2026 को आदेश जारी कर उन्हें 28 से 30 जून तक लखनऊ स्थित अपने घर में ही रहने को कहा था। सहनी का कहना था कि उन्हें इस रोक की वजह नहीं बताई गई। याचिका में यह भी बताया गया कि सहनी ने इस बारे में केंद्र सरकार को चिट्ठी लिखी थी। इसके बाद गृह मंत्रालय ने 30 जून को उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को चिट्ठी भेजकर सहनी को रोके जाने का कारण उन्हें बताने को कहा था। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सरकारी वकील से सीधे पूछा कि क्या मुकेश सहनी को उनके घर में रोके जाने की वजह बताई गई थी। सरकारी पक्ष इस सवाल का कोई साफ जवाब नहीं दे पाया। इस पर न्यायालय ने राज्य सरकार को मामले की पूरी जानकारी के साथ जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर को होगी।
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सहनी को घर में रोकने पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब:सरकार से पूछा- क्या उन्हें वजह बताई गई थी?; अगली सुनवाई 16 सितंबर को