सरकारी सील काटते अस्पताल संचालक का VIDEO:स्वास्थ्य विभाग ने पकड़ा; सील अस्पताल में फिर ऑपरेशन करते दिखे


सिद्धार्थनगर के इटवा कस्बे में जनता सेवा हॉस्पिटल में सरकारी सील तोड़ने और चिकित्सा गतिविधियां जारी रखने का गंभीर मामला सामने आया है। 24 अगस्त की रात राकेश यादव को अस्पताल की सरकारी सील काटते हुए वीडियो में देखा गया। इसी दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उसे मौके पर ही पकड़ लिया। जांच के दौरान अस्पताल के बाहर और ऑपरेशन थिएटर पर लगी दोनों सरकारी सील टूटी मिलीं। अस्पताल के अंदर मरीजों के साथ आए लोग मौजूद थे, हालांकि टीम के पहुंचने से पहले ही एक-दो दिन पहले ऑपरेशन किए गए मरीज को दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया था। मौके से ऑपरेशन के औजार, खून के निशान वाली सामग्री और रूई भी बरामद हुई, जिससे मामले की गंभीरता बढ़ गई है। जनता सेवा हॉस्पिटल 23 मई की रात सी-सेक्शन के दौरान नवजात की मौत के बाद से ही स्वास्थ्य विभाग की जांच के दायरे में है। नवजात की मौत के बाद एक तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी। समिति की जांच पूरी होने और अंतिम निर्णय आने तक अस्पताल की ओपीडी और इमरजेंसी सेवाएं बंद रखने के निर्देश दिए गए थे। इन निर्देशों के बावजूद अस्पताल में मरीजों को भर्ती कर इलाज और ऑपरेशन किए जाने की शिकायतें मिल रही थीं। इसी सूचना पर 27 जून की रात स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल पर छापा मारा था। तब अस्पताल अंदर से बंद मिला था, लेकिन जांच के दौरान सी-सेक्शन के बाद दो प्रसूताएं भर्ती मिली थीं, जिन्हें मेडिकल कॉलेज शिफ्ट कराया गया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को सील कर दिया था और अस्पताल के बाहर तथा ऑपरेशन थिएटर के बाहर दो सील लगाई थीं। सील किए जाने के बाद अस्पताल की जांच में स्वास्थ्य विभाग को 50 से अधिक चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ की डिग्रियां मिली थीं। इनमें 1982 और 1984 में चिकित्सा शिक्षा पूरी करने वाले चिकित्सकों की डिग्रियां भी शामिल थीं। इसके अलावा करीब 20 अलग-अलग लोगों के फोटो और 10 व 50 रुपये के 30 से अधिक स्टांप पेपर भी बरामद हुए थे। इन दस्तावेजों को स्वास्थ्य विभाग ने जब्त कर जांच में शामिल किया था।

अब 24 अगस्त की रात इस सील अस्पताल में दोबारा स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची तो दोनों सील टूटी मिलीं। इसी दौरान सील तोड़ने का वीडियो भी सामने आया, जिसमें राकेश यादव सील काटता दिखाई दे रहा है। टीम ने मौके पर उसे पकड़ लिया। अस्पताल के अंदर मरीज के साथ आए लोग मौजूद थे। पूछताछ और मौके की स्थिति से पता चला कि एक मरीज का करीब एक-दो दिन पहले ऑपरेशन किया गया था। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंचने से पहले ही राकेश यादव उस मरीज को दूसरी जगह शिफ्ट कर चुका था।

अस्पताल के अंदर जांच के दौरान ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाले औजार और अन्य सामग्री मिली। एक कार्टन में रखी रूई और अन्य सामान पर खून के निशान भी मिले। सील किए गए अस्पताल में हाल में ऑपरेशन किए जाने के संकेत मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया। अब जांच का सवाल यह है कि सील तोड़कर मरीज को अस्पताल में किसने भर्ती किया, ऑपरेशन किसने किया और मरीज को टीम के पहुंचने से पहले दूसरी जगह क्यों शिफ्ट किया गया।

नैदानिक स्थापना के नोडल अधिकारी डॉ. मानवेंद्र पाल ने बताया कि अस्पताल पर लगाई गई दोनों सील टूटी मिलीं और मौके पर राकेश यादव को पकड़ा गया। उसे इटवा थाने के हवाले कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि मामले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से तहरीर देकर कानूनी कार्रवाई कराई जाएगी। साथ ही जनता सेवा हॉस्पिटल का पंजीकरण निरस्त करने की कार्रवाई भी की जाएगी।

जनता सेवा हॉस्पिटल का मामला अब सिर्फ नवजात की मौत की जांच तक सीमित नहीं है। पहले अस्पताल को सेवाएं बंद रखने का निर्देश, फिर सील के बावजूद प्रसूताओं का भर्ती मिलना, 50 से अधिक डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की डिग्रियां व स्टांप पेपर बरामद होना और अब दोनों सरकारी सील टूटी मिलना तथा सील काटते राकेश यादव का वीडियो सामने आना पूरे मामले को गंभीर बना रहा है। फिलहाल राकेश यादव इटवा थाने में है। स्वास्थ्य विभाग की तहरीर और पुलिस जांच के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।

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