सम्भल में 45 साल से शिया-सुन्नी एकता की मिसाल:हज़रत अब्बास अलैहिस्सलाम का अलम मुबारक जुलूस निकाला गया


सम्भल के थाना हजरतनगर गढ़ी क्षेत्र के कस्बा सिरसी स्थित मोहल्ला चौधरियान में मंगलवार देर शाम 8 बजे हज़रत अब्बास अलैहिस्सलाम का अलम-ए-मुबारक जुलूस निकाला गया। इस पारंपरिक जुलूस में अहले सुन्नत जमात और शिया समुदाय के लोगों ने मिलकर हिस्सा लिया, जो आपसी भाईचारे और एकता का प्रतीक बना। जुलूस से पहले मजलिस-ए-सय्यदुश शोहदा अलैहिस्सलाम का आयोजन हुआ। इसमें मास्टर गदीरुल हसन और उनके साथियों ने सोज़खानी पेश की।
प्रसिद्ध शायर मारूफ सिरसीवी ने कर्बला की घटना, इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम, हज़रत अब्बास अलैहिस्सलाम और उनके साथियों की कुर्बानियों पर प्रकाश डाला। मजलिस के बाद अलम-ए-मुबारक का जुलूस पारंपरिक मार्गों से निकला। इस दौरान नौहाखानी और सीनाज़नी की गई। अज़ादारों ने हज़रत अब्बास अलैहिस्सलाम की शहादत और वफ़ादारी को याद किया। जुलूस में स्थानीय अंजुमनों ने अपनी पारंपरिक शैली में नौहाखानी की। इनमें अंजुमन रौनक-ए-अज़ा, अंजुमन मुहाफिज़-ए-अज़ा, अंजुमन गुंचा-ए-इस्लाम, अंजुमन शमीम-ए-ईमान, अंजुमन फ़ैज़-ए-पंजेतन और अंजुमन गोहर-ए-अज़ा प्रमुख रूप से शामिल थीं।
आयोजकों के अनुसार, यह पारंपरिक जुलूस पिछले 40 से 45 वर्षों से लगातार निकाला जा रहा है। इसकी मुख्य विशेषता यह है कि इसमें दोनों समुदाय के लोग बिना किसी भेदभाव के एक साथ शामिल होते हैं। यह जुलूस कर्बला के शहीदों को याद करने और समाज को आपसी सौहार्द, भाईचारे तथा शांति का संदेश देने के उद्देश्य से आयोजित किया जाता है। जुलूस निर्धारित मार्गों से होते हुए इमामबारगाह कला गरबी पहुंचकर शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

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