![]()
3 दिवसीय दौरे पर गुरुवार की रात गोरखपुर पहुंचे भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं उत्तर प्रदेश के प्रभारी विनोद तावड़े के प्रवास का दूसरा दिन बैठकों में गुजरा। शुक्रवार सुबह 9 बजे से क्षेत्रीय, जिला एवं महानगर की बैठक शुरू हुई। इसमें गोरखपुर क्षेत्र में निवास करने वाले वे नेता भी शामिल हुए, जिनके पास प्रदेश स्तरीय पदभार है। संगठन की इस बैठक में करीब 2:30 घंटे तक विनोद तावड़े यह समझाते रहे कि चुनाव की दृष्टि से क्या करना है, कहां फोकस होगा और किस तरह की रणनीति अपनानी है।
इसके विपरीत सांसदों, विधायकों, मेयर, नगर पालिका अध्यक्षों, नगर पंचायत अध्यक्षों एवं पूर्व जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक में उनसे चुनाव का हाल जाना। धरातल पर क्या माहौल है, इसके बारे में पूछा। कई सांसदों व विधायकों ने खड़े होकर अपनी बताई। कुछ ने समस्याओं का भी जिक्र किया। रात में तावड़े ने शहर के प्रतिष्ठित उद्योगपतियों एवं व्यापारियों के साथ मुलाकात की। बैठक का सिलसिला संगठन के पदाधिकारियों के साथ शुरू हुआ। विनोद तावड़े ने सीधे शब्दों में तीन टास्क सभी को दिए। उन्होंने कहा कि हमें राजनीतिक विश्लेषण करना होगा। यानी बूथ से लेकर विधानसभा स्तर तक यह देखना होगा कि कौन ज्यादे प्रभावी है, किसके साथ आने से पार्टी को फायदा हो सकता है और विपक्षी दलों की ताकत क्या है, वे कैसे प्रत्याशी मैदान में उतारने वाले हैं। उन्होंने कहा कि संगठन इस बात का ध्यान जरूर रखे कि क्या किसी दूसरे दल के नेता को पार्टी में लाया जा सकता है। राजनीतिक विश्लेषण के साथ उन्होंने सामाजिक विश्लेषण करने की बात भी कही। तावड़े का कहना था कि जो भी धार्मिक व सामाजिक संगठन हैं, उनसे मेलजोल रखा जाए। उनका राजनीतिक रुझान किस ओर है, इसका पता लगाया जाए। यदि सरकार से कोई नाराजगी है तो उसे भी समझा जाए। प्रदेश प्रभारी ने संगठनात्मक विश्लेषण पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि पदाधिकारी कार्यकर्ताओं के संपर्क में रहें और उन्हें पूरा सम्मान दें। दूसरे दलों की गतिविधियों पर भी ध्यान रखने की जरूरत है। उन्होंने संगठन के पदाधिकारियों से कहा कि शांतिपूर्वक अपना काम करते जाइए। 100 काम करिए तो उसे एक गिनिए। उन्होंने सीटवार वहां की स्थितियों के बारे में जानकारी भी ली। कुछ जिलों के संगठन में खींचतान की खबरों को लेकर भी उन्होंने चर्चा की।
उन्होंने कहा कि यह देखें कि क्षेत्र में वह कौन नेता हो सकता है, जिसे अपने साथ ला सकते हैं। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में गोरखपुर की दो विधानसभा सीटों के हारने का कारण पूछा। बांसगांव एवं चिल्लूपार में हार हुई थी। उन्होंने चिल्लूपार का खास जिक्र किया और वहां तैयारी में जुटे नेताओं के बारे में जानकारी भी ली। उन सीटों का भी विश्लेषण किया गया, जहां 2022 की तुलना में 2024 में जहां जीत का अंतर कम हुआ हो या हार का अंतर बढ़ा हो या जीत के स्थान पर हार मिली हो, उन विधानसभा क्षेत्रों को विशेष रूप से देखा गया। उन्होंने कहा कि यह भी विश्लेषण कर लिया जाए कि बूथ स्तर से लेकर विधानसभा स्तर तक प्रचार के लिए किस जाति के नेता की जरूरत होगी। सोशल मीडिया टीम से उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर सक्रियता बनाए रखें। इसके बाद वर्तमान जनप्रतिनिधियों के साथ प्रदेश प्रभारी ने बैठक की। इस बैठक में केंद्रीय मंत्री कमलेश पासवान, कैबिनेट मंत्री सूर्य प्रताप शाही, सांसद रविकिशन शुक्ल, डुमरियागंज के सांसद जगदंबिका पाल, राज्यसभा सदस्य एवं पूर्व राष्ट्रीय महासचिव डा. राधामोहन दास अग्रवाल एवं गोरखपुर क्षेत्र के अधिकतर विधायह मौजूद रहे। इस बैठक में प्रदेश प्रभारी ने जनप्रतिनिधियों को बोलने का मौका दिया। सांसदों की ओर से भी बात रखी गई। एक सांसद ने कहा कि विकास तो खूब हो रहा है लेकिन जनता विकास पर वोट कहां दे रही है। संगठन में लोगों को पद नहीं मिला। इससे कार्यकर्ता नाराज होते हैं। कुछ विधायकों ने पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारियों द्वारा न सुनने की बात कही। यह भी अपेक्षा की कि कम से कम अगले 6 महीने सुनवाई हो जाए।
इसके बाद पूर्व जनप्रतिनिधियों की बात भी तावड़े ने सुनी। इसमें कई बुजुर्ग नेता भी थे, उन्होंने अपने समय के हालात का जिक्र किया। 2017 की तरह ही 2027 में भी जीत दर्ज करना है
तावड़े ने संगठन के पदाधिकारियों की बैठक में कहा कि जिस तरह से 2017 में जीत मिली थी, उससे भी बड़ी जीत 2027 में होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 2017 में कोई ऐसा नेता नहीं था, जिसके बारे में कहा जाए कि उसके नाते जीत मिली। यह कार्यकर्ताओं और पार्टी के नाते हुआ है। इसलिए पिछले चुनावों में जो कमियां रह गई हैं, उसे दूर करने की जरूरत है और 2017 से बड़ी जीत दर्ज करनी है। युवाओं से मिलिए, उन्हें सुनिए तावड़े ने युवा मतदाताओं से मेलजोल बढ़ाने को कहा। उन्होंने कहा कि युवाओं के बीच उठिए-बैठिए। उन्हें भाजपा के लिए मोटिवेट करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जब भी युवाओं से मिलिए तो सुनने की आदत डालिए। वे सवाल करेंगे और उसका हल भी बताएंगे। युवा संवाद के कार्यक्रम कराने की जरूरत है।
Source link
संगठन को समझाया; सांसदों, विधायकों को सुना:पूरे दिन बैठक कर 62 विधानसभा क्षेत्रों का जमीनी हाल पता करते रहे विनोद तावड़े