शक में पत्नी की हत्या, पति को उम्रकैद:जुड़वां बेटियों की गवाही से मां के हत्यारे पिता को हुई आजीवन कारावास की सजा


आगरा में पत्नी की हत्या के सनसनीखेज मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरोपी पति को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अपर जिला न्यायाधीश यशवंत कुमार सरोज की अदालत ने दोषी धर्मेंद्र पाराशर उर्फ धीरज पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। अदालत ने माना कि आरोपी ने शक के आधार पर अपनी पत्नी रुचि श्रीवास्तव की दुपट्टे से गला घोंटकर हत्या की थी। इस मामले में आरोपी को सजा दिलाने में उसकी जुड़वां बेटियों रिद्धि और सिद्धि की चश्मदीद गवाही बेहद अहम साबित हुई। थाना जगदीशपुरा में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार मृतका की मां गजल उर्फ बेबी श्रीवास्तव ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने पुलिस को बताया था कि उनकी बेटी रुचि ने करीब 10 वर्ष पहले मथुरा जनपद के गोवर्धन बड़ा बाजार निवासी धर्मेंद्र पाराशर उर्फ धीरज से प्रेम विवाह किया था। शादी के बाद दंपति की जुड़वां बेटियां रिद्धि और सिद्धि तथा एक छोटी बेटी तनु श्री हुई। आरोप था कि शादी के बाद से ही आरोपी पति अपनी पत्नी पर शक करता था और आए दिन उसके साथ मारपीट करता था। अभियोजन के अनुसार 25 मार्च 2021 की रात आरोपी ने पत्नी से विवाद के बाद पहले मारपीट की। इसके बाद उसने कमरे का दरवाजा बंद कर दुपट्टे से रुचि का गला घोंट दिया। वारदात के समय छोटी बेटी तनु कमरे में सो रही थी, जबकि जुड़वां बेटियों को आरोपी ने छत पर भेज दिया था। बेटियों ने अदालत को बताया कि उन्होंने खिड़की से पूरा घटनाक्रम देखा था। उन्होंने देखा कि पिता ने मां के गले में दुपट्टा कसकर उनकी हत्या कर दी और बाद में चेहरे को ढक दिया। बेटियों के मुताबिक, घटना के बाद पिता ने उन्हें कहा था कि मां को नींद की गोली देकर सुलाया गया है। इसके बाद आरोपी ने मां का पर्स खोला और उसमें रखे रुपये, मोबाइल फोन व जरूरी कागजात निकाल लिए। फिर तीनों बेटियों को घर में छोड़कर मौके से फरार हो गया। कुछ देर बाद मकान मालिक ने मृतका के मायके पक्ष को फोन कर घटना की जानकारी दी। सूचना मिलने पर मां गजल श्रीवास्तव मौके पर पहुंचीं तो बेटी का शव पलंग पर पड़ा मिला और तीनों बच्चियां रो रही थीं। मृतका के मुंह से खून निकल रहा था। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में नौ गवाह पेश किए गए। इनमें वादी गजल श्रीवास्तव, मृतका की जुड़वां बेटियां रिद्धि और सिद्धि, पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर वीरेंद्र सिंह तथा विवेचक सुनील कुमार शर्मा समेत अन्य गवाह शामिल रहे। अदालत ने चश्मदीद बेटियों की गवाही, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों को महत्वपूर्ण मानते हुए आरोपी धर्मेंद्र पाराशर उर्फ धीरज को दोषी करार दिया और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

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