लखनऊ में भारतीय सिनेमा के पुराने किस्से और दुर्लभ फिल्में:अलीगंज कला स्रोत आर्ट गैलरी में बायस्कोप-2 प्रदर्शनी शुरू, 4 अक्टूबर तक चलेगी


भारतीय सिनेमा के पुराने किस्सों और दुर्लभ फिल्मों की यादें अब लखनऊ में देखने को मिला। अलीगंज स्थित कला स्रोत आर्ट गैलरी में शनिवार से बायस्कोप-2 ‘गुमनाम है कोई’ प्रदर्शनी शुरू हो गईं हैं। 4 अक्टूबर तक चलने वाली प्रदर्शनी में 1930 के दशक से लेकर आज तक की फिल्मों के दुर्लभ मूल पोस्टर, पुरानी तस्वीरें और सिनेमा से जुड़ी चीजें प्रदर्शित की जा रही हैं। प्रदर्शनी में अभिनेता, पटकथा लेखक और रंगमंच से जुड़े अतुल तिवारी मुख्य अतिथि रहे। फिल्मकार और फिल्म इतिहासकार करण बाली विशिष्ट अतिथि रहे। प्रदर्शनी सुबूर उस्मानी के निजी संग्रह और क्यूरेशन पर आधारित है। पोस्टरों के साथ छिपी कहानियां भी सामने आएंगी प्रदर्शनी में सिर्फ चर्चित फिल्मों और कलाकारों के पोस्टर नहीं हैं। इनमें सिनेमा से जुड़े कई अनोखे किस्से और रोचक जानकारियां भी हैं। 1939 की कंगन, 1943 की राम राज्य, 1946 की फ्लाइंग प्रिंस, 1953 की शोले और चाचा चौधरी, 1972 की समाधि और 1975 की जोरो से जुड़े तथ्य भी यहां देखने को मिलेंगे। आयोजकों के मुताबिक राम राज्य वह फिल्म थी जिसे महात्मा गांधी ने देखी थी। वहीं 1953 में बनी शोले का नाम 1975 की रमेश सिप्पी की चर्चित फिल्म से पहले भी इस्तेमाल हो चुका था। दूरदर्शन के दौर की यादें ताजा प्रदर्शनी में 1980 के दशक के दूरदर्शन वाले दौर की झलक भी है। उस समय टीवी पर फिल्म देखना पूरे परिवार के लिए खास मौका होता था। हाथ से बने पोस्टर, पुराने सिनेमाघर, टिकट की कतारें और कई हफ्तों तक चलने वाली फिल्मों का दौर भी इन पोस्टरों में नजर आता है। सुबूर उस्मानी ने बताया कि एक पोस्टर से पूरी फिल्म की कहानी और उसके दौर को समझा जा सकता है। उनके संग्रह में दुर्लभ किताबें, अखबार, पत्र-पत्रिकाएं, तस्वीरें, पोस्टर और सिनेमा से जुड़ी चीजें हैं। प्रदर्शनी का मकसद भारतीय सिनेमा के उन पुराने पन्नों को लोगों तक पहुंचाना है, जो धीरे-धीरे यादों से दूर होते जा रहे हैं।

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