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लखनऊ कनेक्शन वर्ल्डवाइड की ओर से केल्विन तालुकदार कॉलेज में रविवार को पद्मश्री डॉ. अनिल रस्तोगी के सम्मान में अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में साहित्य, रंगमंच, शिक्षा और पत्रकारिता जगत से जुड़े बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। वक्ताओं ने डॉ. रस्तोगी के रंगमंच और विज्ञान के क्षेत्र में योगदान को याद किया। सम्मान समारोह में अपने अनुभव साझा करते हुए पद्मश्री डॉ. अनिल रस्तोगी ने कहा कि जब उन्हें पहली बार रंगमंच से जुड़ने का मौका मिला तो उन्हें डर था कि कहीं नाटक करने की वजह से उनकी नौकरी न चली जाए। हालांकि, उनके वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने उनका हौसला बढ़ाया और कहा कि जब संस्थान में संगीत और नृत्य के कार्यक्रम हो सकते हैं तो नाटक भी होना चाहिए। इसी प्रोत्साहन ने उन्हें रंगमंच में आगे बढ़ने का आत्मविश्वास दिया। वैज्ञानिक जीवन के साथ-साथ रंगमंच की यात्रा उन्होंने बताया कि 1962 में एमएससी के बाद उन्हें सीडीआरआई में फेलोशिप मिली। संस्थान के तत्कालीन निदेशक डॉ. बी. मुखर्जी से लेकर बाद के सभी निदेशकों ने हमेशा उनका सहयोग किया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक जीवन के साथ-साथ रंगमंच की यात्रा इसलिए सफल रही क्योंकि संस्थान और थिएटर जगत दोनों का भरपूर समर्थन मिला। डॉ. रस्तोगी ने कहा कि लखनऊ के रंगकर्मियों ने उन्हें हमेशा सम्मान और स्नेह दिया। कलाकारों ने हर कदम पर उनका साथ निभाया और आगे बढ़ने में मदद की। यही सहयोग उनकी सबसे बड़ी ताकत बना। कलाकारों ने मुंबई फिल्म उद्योग को नई पहचान दी कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप कपूर ने लखनऊ की सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि मैरिस कॉलेज ऑफ म्यूजिक का भारतीय संगीत जगत में बड़ा योगदान रहा है। यहां से निकले अनेक कलाकारों ने मुंबई फिल्म उद्योग को नई पहचान दी। उन्होंने प्रसिद्ध संगीतकार नौशाद से जुड़े अपने संस्मरण भी साझा किए। प्रदीप कपूर ने बताया कि जब भी नौशाद लखनऊ आते थे तो शहर की सांस्कृतिक विरासत और पुराने दिनों की यादें साझा करने के लिए उन्हें अपने साथ रखते थे। उन्होंने कहा कि लखनऊ की कला, संगीत और रंगमंच की परंपरा देशभर में अपनी अलग पहचान रखती है।
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लखनऊ में पद्मश्री डॉ. अनिल रस्तोगी अभिनंदन समारोह:बोले- थिएटर करने पर नौकरी जाने का डर था, वैज्ञानिकों ने दिया था साथ