लखनऊ में द टर्बोलेंट हिस्ट्री किताब का विमोचन:कैसरबाग के लखनऊ बायोस्कोप में हुई लॉन्चिंग, शहर की तहजीब पर हुई चर्चा


लखनऊ के कैसरबाग स्थित लखनऊ बायोस्कोप में इतिहासकार डॉ. रोशन तकी की किताब लखनऊ: द टर्बोलेंट हिस्ट्री का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में लखनऊ के इतिहास, संस्कृति और गंगा-जमुनी तहजीब पर चर्चा हुई। कार्यक्रम की शुरुआत यास्मीन खान ने डॉ. रोशन तकी और उनकी किताब के परिचय से की। उन्होंने कहा कि यह किताब लखनऊ के इतिहास को मानवीय संवेदनाओं के साथ सामने लाती है। इसमें शहर की गंगा-जमुनी तहजीब और लोगों के दर्द की झलक मिलती है। किताब लिखने के लिए प्रेरित किया डॉ. रोशन तकी ने बताया कि ब्रिटिश शासन के दौरान अवध और यहां के नवाबों को लेकर कई ऐतिहासिक धारणाएं बनीं। इनसे लखनऊ की असली पहचान और यहां के सामाजिक जीवन के कई पहलू पीछे छूट गए। नवाब वाजिद अली शाह और बेगम हजरत महल जैसी ऐतिहासिक हस्तियों से जुड़ी कहानियों को सही संदर्भ में समझाना जरूरी है। इसी सोच ने उन्हें किताब लिखने के लिए प्रेरित किया। विमोचन के बाद इतिहास की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सनूबर हैदर (किदवई) ने किताब के कुछ अंश पढ़कर सुनाए। वह नेताजी सुभाष चंद्र बोस राजकीय पीजी कॉलेज, लखनऊ में कार्यरत हैं। शहर से जुड़े कई दिलचस्प किस्से साझा किए कार्यक्रम के अंत में पाठकों और दर्शकों के साथ संवाद हुआ। डॉ. तकी ने लखनऊ से जुड़े कई दिलचस्प किस्से साझा किए। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और अन्य देशों में बसे लखनऊ के लोगों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि लखनऊ की तहजीब और सांस्कृतिक पहचान भौगोलिक सीमाओं से परे भी लोगों के साथ बनी हुई है। डॉ. रोशन तकी लखनऊ की संस्कृति, ऐतिहासिक स्मारकों और उनके संरक्षण के विशेषज्ञ हैं। उनके नाम 140 से अधिक शोधपत्र हैं। वहीं, यास्मीन खान शिक्षाविद् और इतिहासकार हैं। उन्हें अध्यापन का 24 साल से अधिक अनुभव है। वह महिला सशक्तीकरण, बाल विकास और सामाजिक सुधार से जुड़ी पहलों में भी सक्रिय हैं।

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