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लखनऊ आशियाना स्थित आर्टेलिया इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट में आयोजित दो दिवसीय लिप्पन आर्ट कार्यशाला का रविवार को सफल समापन हो गया। मिट्टी, शीशों और कल्पनाशीलता के संगम से सजी पारंपरिक लिप्पन कला ने कला प्रेमियों को नई अभिव्यक्ति दी। कार्यशाला में प्रतिभागियों ने इस लोक कला की बारीकियां सीखीं और अपनी रचनात्मकता को आकर्षक कलाकृतियों के रूप में उकेरा। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को लिप्पन आर्ट की तकनीक, डिजाइन निर्माण, रिलीफ वर्क, मिरर वर्क और फिनिशिंग का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में प्रतिभागियों ने उत्साह के साथ अपनी-अपनी कलाकृतियां तैयार कीं। लोक कलाएं हमारी सांस्कृतिक विरासत की पहचान कार्यक्रम का संयोजन राहुल गौतम ने किया। प्रशिक्षण सत्र में सुजाता, राहुल, अंशु, सुमेधा और रिया ने प्रतिभागियों को लिप्पन आर्ट की बारीकियां सिखाईं और रचनात्मक प्रयोगों के लिए प्रेरित किया।समापन समारोह में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र दिया गया । संस्थान के निदेशक अरेंद्र चौधरी ने कहा कि लोक कलाएं हमारी सांस्कृतिक विरासत की पहचान हैं। इन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है, ताकि पारंपरिक कला का संरक्षण और संवर्धन हो सके। लिप्पन आर्ट सीखने का अनुभव बेहद रोचक रहा प्रतिभागी उपमा गुप्ता ने बताया कि उन्हें पेंटिंग का बचपन से शौक है। लंबे समय से ऐसे संस्थान की तलाश थी, जहां नई कला सीखने का अवसर मिले। उन्होंने बताया कि इससे पहले उन्होंने मंडला आर्ट कार्यशाला में भाग लिया था और लिप्पन आर्ट की यह उनकी दूसरी कार्यशाला है। सुशांत गोल्फ सिटी निवासी पुष्पा गुप्ता ने कहा कि लिप्पन आर्ट सीखने का अनुभव बेहद रोचक रहा। यह कला चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन इसकी खूबसूरती और रचनात्मकता इसे बेहद खास बनाती है।
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लखनऊ में दो दिवसीय लिप्पन आर्ट कार्यशाला:आर्टेलिया इंस्टीट्यूट में प्रतिभागियों ने सीखी पारंपरिक कला की बारीकियां