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रवीन्द्रालय में जारी ‘लखनऊ पुस्तक मेले’ के दूसरे दिन किताबों की खास खरीदारी देखी गई।मेले में जहां एक ओर अध्यात्म की गहराई है, वहीं दूसरी ओर शहीद भगत सिंह के क्रांतिकारी विचार युवाओं को अपनी ओर खींच रहे हैं। नेशनल बुक ट्रस्ट के स्टॉल पर ‘मैं नास्तिक हूं’ की भारी मांग देखी जा रही है। युवाओं की पसंद: भगत सिंह की किताबों के साथ-साथ बच्चों के लिए ‘वैदिक मैथमेटिक्स’ और उर्दू साहित्य की खूब बिक्री हो रही है।बड़ी छूट: मेले में प्रवेश पूरी तरह नि:शुल्क है और हर किताब पर पाठकों को कम से कम 10% डिस्काउंट मिल रहा है। साहित्यिक जमघट: अवध के लोक इतिहास से लेकर गजल संग्रहों तक, आज आधा दर्जन से अधिक नई पुस्तकों का विमोचन हुआ।खास चर्चा: वास्तुविद विपुल वार्ष्णेय की पुस्तक ‘अवध के मंदिर’ पर विशेष परिचर्चा हुई, जिसमें पद्मश्री डॉ. विद्या विंदु सिंह ने अध्यक्षता की।डॉ. शिप्रा चतुर्वेदी की ‘जर्मन लोककथाएं’ पर न केवल चर्चा हुई, बल्कि कलाकारों ने ‘टिल’ कथा का प्रभावी मंचन भी किया। एक ही मंच पर सजी कई विधाएं नवसृजन प्रकाशन के समारोह में साहित्य की विभिन्न विधाओं का संगम दिखा। डॉ. उषा सिन्हा और सुल्तान शाकिर हाशमी जैसे दिग्गजों की मौजूदगी में मंजू सक्सेना की लघुकथा ‘एक कप चाय’, हेमंत कुमार का ‘अवध का लोक इतिहास’ और मनोरमा श्रीवास्तव का गजल संग्रह ‘तितलियों के देश में’ सहित कई कृतियों का लोकार्पण हुआ। शाम का समापन ‘साहित्य साधक संस्था’ की सुरीली काव्य गोष्ठी के साथ हुआ।
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लखनऊ पुस्तक मेले में दूसरे दिन किताबों की खूब बिक्री:अध्यात्म से लेकर क्रांतिकारी विचारों तक की पुस्तकें पसंद की गईं