लखनऊ नाट्य महोत्सव: 'द सेडक्शन' ने दर्शकों को हंसाया:अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में आकांक्षा थियेटर आर्ट्स ने हास्य नाटक का मंचन किया


लखनऊ के अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में चल रहे नाट्य महोत्सव की दूसरी संध्या हंसी और व्यंग्य के रंगों से सराबोर रही। आकांक्षा थियेटर आर्ट्स लखनऊ की ओर से आयोजित इस महोत्सव में श्रद्धा मानव सेवा कल्याण समिति द्वारा तैयार हास्य नाटक ‘द सेडक्शन’ का मंचन किया गया। एंटोन चेखव की चर्चित रचना पर आधारित इस नाटक ने दर्शकों को शुरुआत से अंत तक बांधे रखा। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय, नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित रहा। इस 60 दिवसीय कार्यशाला के अंतर्गत तैयार इस प्रस्तुति का निर्देशन रंग निर्देशक तुषार बाजपेई शुभम ने किया। नाटक एक ऐसे अहंकारी व्यक्ति की कहानी को मंच पर उतारता है, जो खुद को महिलाओं को बहकाने में माहिर समझता है। कहानी में उसके आत्मविश्वास, चालाकी और हास्यास्पद परिस्थितियों के बीच पैदा होने वाले व्यंग्य को बेहद रोचक अंदाज में दिखाया गया। कलाकारों ने प्रभावशाली अभिनय से खूब तालियां मंच पर जैसे ही पीटर सिम्योनिच का किरदार सामने आया, दर्शकों की हंसी थमने का नाम नहीं ले रही थी। इस भूमिका में तुषार बाजपेई शुभम ने शानदार अभिनय किया। वहीं निकोलाईच की भूमिका में अहमद रजा खान और आइरिना के किरदार में मिन्नी दीक्षित ने भी प्रभावशाली अभिनय से खूब तालियां बटोरीं। कलाकारों के संवाद, हाव-भाव और मंचीय तालमेल ने नाटक को जीवंत बना दिया। हास्य का बेहतरीन मिश्रण देखने को मिला नाटक की सेट डिजाइनिंग नदीम अंसारी और अजगर अली ने तैयार की, जो कहानी के अनुरूप आकर्षक नजर आई। पूरी प्रस्तुति में सामाजिक व्यंग्य, मानवीय रिश्तों की उलझन और हास्य का बेहतरीन मिश्रण देखने को मिला। दर्शकों की लगातार गूंजती तालियों ने यह साबित कर दिया कि ‘द सेडक्शन’ मंच पर हास्य का जादू बिखेरने में पूरी तरह सफल रहा।

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