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लखनऊ के इंदिरा नगर स्थित जैन मंदिर में सिद्धचक्र महामंडल विधान के दूसरे दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक पूजा-अर्चना की। अनुष्ठान की शुरुआत भगवान के अभिषेक से हुई। सिद्धचक्र यंत्र पर श्रीपाल और मैना सुंदरी के रूप में संभव जैन व दर्शिका जैन ने विशेष अभिषेक किया। विधानाचार्य आशीष पुनयांश ने भजनों के साथ पूजन संपन्न कराया। अपने प्रवचन में आचार्य सुबल सागर महाराज ने कहा कि भगवान आठों कर्मों से मुक्त होते हैं। हमें भी अपने कर्मों की निर्जरा का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि कमजोर ग्रह वाले व्यक्तियों को केवल भगवान की भक्ति करनी चाहिए। आचार्य महाराज ने व्यर्थ के कर्मकांडों से बचने और सच्चे देव, शास्त्र तथा गुरु पर श्रद्धा रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सच्ची श्रद्धा ही मोक्ष का मार्ग है। आचार्य ने जैन धर्म के मूल सिद्धांत ‘अहिंसा’ के पालन का आह्वान किया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने यथासंभव अहिंसा व्रत अपनाने का संकल्प लिया। इसके बाद धार्मिक अंताक्षरी का आयोजन हुआ, जिसमें बच्चों और महिलाओं ने भजनों की प्रस्तुति दी। जैन समाज के महामंत्री अभिषेक जैन ने बताया कि आचार्य सुबल सागर महाराज के चातुर्मास कलश स्थापना की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। यह आयोजन इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में होगा, जहाँ महाराज चार महीने प्रवास कर श्रद्धालुओं को धर्म लाभ प्रदान करेंगे। इस अवसर पर अभय, संजीव, सलिल, आयुष, विशाल, सुबोध और पारस सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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लखनऊ जैन मंदिर में सिद्धचक्र विधान का दूसरा दिन:भक्तों ने की पूजा-अर्चना, आचार्य सुबल सागर ने दिए प्रवचन