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आज की पीढ़ी के पास बहुत ज्यादा सामग्री उपलब्ध है, लेकिन गहराई से पढ़ने का समय कम होता जा रहा है। बच्चों से सिर्फ किताबें पढ़ने के लिए कहना पर्याप्त नहीं है। उन्हें किताबों की अहमियत समझानी होगी और पढ़ने की आदत विकसित करने में मदद करनी होगी। यह बात दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने गुरुवार को पांचवें गोमती पुस्तक महोत्सव में छात्रों से संवाद के दौरान कही। संधू ने कहा कि बच्चों को सिर्फ किताबों का पाठक बनकर नहीं रहना चाहिए। उन्हें भविष्य के लेखक, कवि, शोधकर्ता और विचारक बनने के लिए भी प्रेरित करना चाहिए। स्कूलों, विश्वविद्यालयों और जिलों में पढ़ने और लिखने की संस्कृति को मजबूत करने की जरूरत है। पढ़ने से सोचने और सवाल करने की क्षमता बढ़ती है उन्होंने कहा कि पढ़ने से सोचने, सवाल करने और नए विचार बनाने की क्षमता विकसित होती है। लिखने से लोग अपने विचार और अनुभव व्यक्त कर पाते हैं। साहित्य अलग-अलग संस्कृतियों, भाषाओं और नजरिए को जोड़ने का काम करता है।
संधू ने कहा कि किताबें भाषा, भौगोलिक दूरी, सामाजिक वर्ग और समय की सीमाओं को पार कराती हैं। इससे पाठकों को अपने से अलग अनुभवों और नजरिए को समझने का मौका मिलता है। ऐसे मंच सवाल, चर्चा और संवाद को बढ़ावा देते हैं। इससे विचारों का आदान-प्रदान होता है और खुले समाज को मजबूती मिलती है। AI का इस्तेमाल करें, लेकिन सोचने की क्षमता बनाए रखें संधू ने छात्रों से AI का समझदारी से इस्तेमाल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि तकनीक उपयोगी साधन है, लेकिन छात्रों को सोचने और निर्णय लेने के लिए पूरी तरह AI पर निर्भर नहीं होना चाहिए। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम और नेतृत्व के उदाहरण के तौर पर सरदार तेजा सिंह समुंदरी के जीवन का भी जिक्र किया। कहा कि युवाओं को उनके जीवन, नेतृत्व और स्वतंत्रता संग्राम में योगदान के बारे में पढ़ना और समझना चाहिए।
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लखनऊ के गोमती पुस्तक महोत्सव में पहुंचे दिल्ली के LG:बोले- बच्चों को सिर्फ किताबें पढ़ने को न कहें, उनकी अहमियत भी समझाएं