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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के आयुक्त को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से न्यायालय में उपस्थित होना पड़ा। यह उपस्थिति यूपी रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (यूपी रेरा) के आदेश के अनुपालन में देरी और रिकवरी सर्टिफिकेट में निर्धारित रकम से कम राशि का चेक दिए जाने पर हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद हुई। न्यायालय में सुबह सवा दस बजे उपस्थित होने के बाद आयुक्त की ओर से एक पूरक शपथपत्र दाखिल किया गया। इसमें न्यायालय को बताया गया कि गलती सुधार ली गई है और जारी किए गए रिकवरी सर्टिफिकेट तथा पहले दी गई रकम के बीच का अंतर याची को भुगतान कर दिया गया है। यह मामला शिकायतकर्ता अशोक कुमार सिंह से संबंधित है। यूपी रेरा ने 29 जुलाई 2025 को उनके पक्ष में फैसला सुनाया था। बाद में, आदेश के अनुपालन के लिए कार्रवाई शुरू होने पर 27 मई 2026 को 26,58,806.01 रुपये का रिकवरी सर्टिफिकेट जारी किया गया था। हालांकि, राजस्व अधिकारियों द्वारा इस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, जिसके कारण शिकायतकर्ता को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ के समक्ष हुई।
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रेरा रिकवरी सर्टिफिकेट में लापरवाही पर हाईकोर्ट सख्त:आवास परिषद आयुक्त को होना पड़ा पेश, कम रकम का चेक देने पर कोर्ट नाराज