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सोनभद्र के पिपरी स्थित रिहंद बांध का जलस्तर इस वर्ष मानसून के डेढ़ माह बाद भी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सका है। गुरुवार 30 जुलाई को बांध का जलस्तर 845.4 फीट दर्ज किया गया, जबकि पिछले वर्ष इसी तारीख को यह 868.1 फीट था। यानी एक वर्ष में जलस्तर 22.7 फीट कम है। 15 जून को बांध का जलस्तर 845.6 फीट था, जो अब तक बढ़ने के बजाय 0.2 फीट घट गया है। ऐसे में इस वर्ष बांध के पूरी क्षमता तक भरने की संभावना कमजोर होती नजर आ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार इस वर्ष अल नीनो के प्रभाव के कारण मानसून अपेक्षाकृत कमजोर रहा है। रिहंद बांध के कैचमेंट क्षेत्र में सामान्य से कम वर्षा होने के चलते बांध में पानी की आवक प्रभावित हुई है। इसी वजह से जलस्तर में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो सकी। पिछले वर्ष अच्छी बारिश के कारण 28 जुलाई को ही बांध के फाटक खोलने पड़े थे, जबकि इस बार ऐसी स्थिति फिलहाल बनती नहीं दिख रही है। बिजली उत्पादन जारी, लेकिन भविष्य को लेकर चिंता रिहंद बांध पर स्थापित छह टरबाइनों से फिलहाल नियमित विद्युत उत्पादन किया जा रहा है। हालांकि, यदि आने वाले दिनों में भी अच्छी बारिश नहीं हुई तो जल भंडारण के साथ बिजली उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है। इसका प्रभाव सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और औद्योगिक जलापूर्ति पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है। अगस्त की बारिश पर टिकी उम्मीदें जल संसाधन विभाग और स्थानीय लोगों की निगाहें अब अगस्त माह की बारिश पर टिकी हैं। यदि कैचमेंट क्षेत्र में अच्छी वर्षा होती है तो रिहंद बांध के जलस्तर में सुधार संभव है। वहीं बारिश सामान्य से कम रहने पर इस वर्ष बांध का पूरी क्षमता तक भर पाना मुश्किल हो सकता है।
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रेनूकोट में रिहंद बांध का जलस्तर 22.7 फीट कम:30 जुलाई को जलस्तर 845.4 फीट दर्ज, बिजली उत्पादन और सिंचाई पर बढ़ी चिंता